{"_id":"62990ae34f5b4f08405546fd","slug":"mdda-s-new-houses-are-not-getting-buyers-city-news-drn413510746","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजधानी दून के बिल्डर्स, रियल एस्टेट कारोबारी हो रहे मालामाल, एमडीडीए हो रहा कंगाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजधानी दून के बिल्डर्स, रियल एस्टेट कारोबारी हो रहे मालामाल, एमडीडीए हो रहा कंगाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी के तमाम बिल्डर्स, रियल एस्टेट कारोबारी जहां आवासीय, व्यावसायिक योजनाओं के तहत भवनों का निर्माण करने और बेचने के साथ ही मालामाल हो रहे, वही मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) आवासीय योजनाओं को बनाने के बावजूद कंगाल हो रहा है। ट्रांसपोर्टनगर, सहस्रधारा समेत कई क्षेत्रों में बनाई गईं आवासीय योजनाओं के आवासों को खरीदने को लेकर भवन स्वामी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, जिससे आवास खाली हैं।
मकानों के बिक्री न होने से तमाम आवास खराब हो रहे हैं। आवासीय योजनाओं के निर्माण में आने वाली लागत की दरों पर भी भवन स्वामी खरीदने को राजी नहीं हैं। एमडीडीए के आवासों के बिक्री न होने की मुख्य वजह निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ ही ऊंची कीमतें हैं। फिलहाल एमडीडीए ने नवनिर्मित आवासों की जगह भवन स्वामियों को प्लाट मुहैया कराने की योजना बनाई है, जिसके लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया था, लेकिन जमीन ढूंढे नहीं मिल रही है। एमडीडीए के पास जितनी जमीनें थी, उनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल किया जा चुका है।
ऐसे में एमडीडीए के पास इतनी जमीन नहीं कि कोई नई आवासीय योजना को धरातल पर उतारा जा सके। उधर, एमडीडीए उपाध्यक्ष बीके संत का कहना है कि आवासीय योजनाओं के आवासों को बेचा जा सके, इसके लिए नए सिरे से योजना तैयार की जा रही है। साथ ही कई नई योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। पिछली बोर्ड बैठक में 250 करोड़ रुपये के बजट का भी प्रावधान किया गया है। जल्द ही अफसरों, इंजीनियरों के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मकानों के बिक्री न होने से तमाम आवास खराब हो रहे हैं। आवासीय योजनाओं के निर्माण में आने वाली लागत की दरों पर भी भवन स्वामी खरीदने को राजी नहीं हैं। एमडीडीए के आवासों के बिक्री न होने की मुख्य वजह निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ ही ऊंची कीमतें हैं। फिलहाल एमडीडीए ने नवनिर्मित आवासों की जगह भवन स्वामियों को प्लाट मुहैया कराने की योजना बनाई है, जिसके लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी पारित किया गया था, लेकिन जमीन ढूंढे नहीं मिल रही है। एमडीडीए के पास जितनी जमीनें थी, उनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल किया जा चुका है।
विज्ञापन
ऐसे में एमडीडीए के पास इतनी जमीन नहीं कि कोई नई आवासीय योजना को धरातल पर उतारा जा सके। उधर, एमडीडीए उपाध्यक्ष बीके संत का कहना है कि आवासीय योजनाओं के आवासों को बेचा जा सके, इसके लिए नए सिरे से योजना तैयार की जा रही है। साथ ही कई नई योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। पिछली बोर्ड बैठक में 250 करोड़ रुपये के बजट का भी प्रावधान किया गया है। जल्द ही अफसरों, इंजीनियरों के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन