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Dehradun News: एमडीडीए दे खरीदार को 13 लाख रुपये ब्याज
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विकास प्राधिकरण की परियोजना के तहत फ्लैट को समय से आवंटित नहीं करने की शिकायत पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड भू-नियामक प्राधिकरण ने खरीदार की जमा रकम पर एमडीडीए को ब्याज देने का फैसला सुनाया है। वहीं, खरीदार ने भी अपनी आखिरी किश्त नहीं जमा की थी। इस पर उसे भी समान दर से विलंब ब्याज देने के आदेश दिए हैं।
रेरा में सर्वज्ञ अग्रवाल निवासी कृष्णानगर मथुरा ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की शिकायत रेरा में दर्ज कराई। कहा, उन्होंने दिसंबर 2015 में ट्रांसपोर्ट नगर में प्रस्तावित एचआईजी आवासीय योजना में टाइप ए-एचआईजी फ्लैट बुक करने के लिए आवेदन किया था। 16 मार्च 2016 को उन्हें आवंटन पत्र जारी किया गया, जिसमें 65 लाख रुपये में एचआईजी फ्लैट का आवंटन किया गया। विज्ञापन के अनुसार परियोजना अक्तूबर 2017 में पूर्ण कर उन्हें आवंटित फ्लैट पर कब्जा दिया जाना था, लेकिन परियोजना की प्रगति संतोषजनक नहीं है।
कार्य अधूरा होने के कारण उन्हें फ्लैट नहीं दिया जा सका। बताया कि उन्होंने फ्लैट की निर्धारित 65 लाख की कीमत के सापेक्ष 5010375 रुपये का भुगतान किया। उधर, एमडीडीए ने अपना पक्ष रखकर कहा कि अनुरोध एवं स्मरण पत्रों के बावजूद शिकायतकर्ता ने अंतिम किस्त का भुगतान न करते हुए आवंटित फ्लैट का कब्जा नहीं लिया। बताया, कोविड के कारण कुछ निर्माण प्रभावित हुआ है। शेष का पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हो चुका है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद रेरा के सदस्य नरेश सी मठपाल ने निर्णय सुनाकर कहा कि एमडीडीए 45 दिन में शिकायतकर्ता को फ्लैट पर कब्जा दिलाए और 10.75 फीसदी की दर से दो वर्ष एक माह का ब्याज 13 लाख 91 हजार 422 रुपये अदा करे। वहीं, शिकायतकर्ता को अंतिम किस्त नहीं देने के कारण विलंब ब्याज 7 लाख 51 हजार 176 रुपये भुगतान करने के आदेश दिए।
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रेरा में सर्वज्ञ अग्रवाल निवासी कृष्णानगर मथुरा ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की शिकायत रेरा में दर्ज कराई। कहा, उन्होंने दिसंबर 2015 में ट्रांसपोर्ट नगर में प्रस्तावित एचआईजी आवासीय योजना में टाइप ए-एचआईजी फ्लैट बुक करने के लिए आवेदन किया था। 16 मार्च 2016 को उन्हें आवंटन पत्र जारी किया गया, जिसमें 65 लाख रुपये में एचआईजी फ्लैट का आवंटन किया गया। विज्ञापन के अनुसार परियोजना अक्तूबर 2017 में पूर्ण कर उन्हें आवंटित फ्लैट पर कब्जा दिया जाना था, लेकिन परियोजना की प्रगति संतोषजनक नहीं है।
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कार्य अधूरा होने के कारण उन्हें फ्लैट नहीं दिया जा सका। बताया कि उन्होंने फ्लैट की निर्धारित 65 लाख की कीमत के सापेक्ष 5010375 रुपये का भुगतान किया। उधर, एमडीडीए ने अपना पक्ष रखकर कहा कि अनुरोध एवं स्मरण पत्रों के बावजूद शिकायतकर्ता ने अंतिम किस्त का भुगतान न करते हुए आवंटित फ्लैट का कब्जा नहीं लिया। बताया, कोविड के कारण कुछ निर्माण प्रभावित हुआ है। शेष का पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हो चुका है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद रेरा के सदस्य नरेश सी मठपाल ने निर्णय सुनाकर कहा कि एमडीडीए 45 दिन में शिकायतकर्ता को फ्लैट पर कब्जा दिलाए और 10.75 फीसदी की दर से दो वर्ष एक माह का ब्याज 13 लाख 91 हजार 422 रुपये अदा करे। वहीं, शिकायतकर्ता को अंतिम किस्त नहीं देने के कारण विलंब ब्याज 7 लाख 51 हजार 176 रुपये भुगतान करने के आदेश दिए।