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हुकूमत ने देश में पैदा किया बिखराव: मौलाना बिलाल 

Tue, 08 Nov 2016 10:48 AM IST
चांद मोहम्मद / अमर उजाला, देहरादून
चांद मोहम्मद / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 08 Nov 2016 10:48 AM IST
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maulana bilal allegation on modi government
Bilal Abdul Hai Nadvi - फोटो : amar ujala

नदवा लखनऊ के प्रोफेसर मौलाना बिलाल अब्दुल हई नदवी का कहना है कि हुकूमत ने सियासी फायदे के लिए तीन तलाक का शिगूफा छोड़कर लोगों में बिखराव पैदा किया है। हुकूमत को किसी वर्ग विशेष की कोई चिंता नहीं है। तीन तलाक को खत्म करना कॉमन सिविल कोड की ओर जाना है।

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ऐसा देश का कोई मजहब स्वीकार नहीं करेगा। तहफ्फुस ए शरीयत और सर्वधर्म सम्मेलन में शिरकत करने दून पहुंचे मौलाना नदवी से अमर उजाला संवाददाता ने तीन तलाक, कॉमन सिविल कोड, मुस्लिमों की शिक्षा, देश के अन्य ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। पेश है बातचीत के कुछ अंश...
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सवाल: तीन तलाक पर केंद्र सरकार के हलफनामे पर क्या कहेंगे ?
जवाब: तीन तलाक का मसला सीधे-सीधे शरीयत में दखलंदाजी है। हुकूमत ने अपने सियासी फायदे के लिए यह शिगूफा छोड़ा है। जो देश के लोगों में इंतशार (बिखराव) पैदा कर रहा है। यह फैसला कॉमन सिविल कोड की ओर ले जाने वाला है। देश केे लोकतंत्र में हर मजहब को आजादी दी गई है। इसीलिए ऐसा नहीं किया जा सकता। 
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सवाल: आगे विरोध की क्या रणनीति रहेगी ? क्या कोई उग्र आंदोलन होगा ?
जवाब: सड़कों पर आना, उग्र आंदोलन कर जनता को परेशान करना किसी समस्या का हल नहीं है। देश का कानून हमारे साथ है। सड़क पर उतरकर नहीं, हम कानूनी लड़ाई लड़ रहे है, लड़ते रहेंगे। 

सवाल: मुसलमानों में शिक्षा का अभाव है? क्या इसीलिए यह दिक्कत आ रही है ? 
जवाब: हां ये बात सही है। मुसलमानों को चाहिए कि वह पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब को अपना आदर्श बनाएं। उनकी जिंदगी के आधार पर जिंदगी जीएं। इंशाअल्लाह दुनिया में सुधार आ जाएगा। 


सवाल: आरोप लगते हैं कि पर्सनल लॉ बोर्ड देश के कानून को नहीं मानता ? 
जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है पर्सनल लॉ बोर्ड कानून के दायरे में रहकर ही काम करता है। शरीयत में भी देश के कानून की इज्जत करने का जिक्र है। 

सवाल: क्या भारत का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बिगाड़ने और बदलने की कोशिश हो रही है?
जवाब: हमारा देश फूलों का एक गुलदस्ता है, जिसमें हर मजहब का फूल खिलता है। ऐसे लोगों से अपील है कि देश के लोगों में और नफरत की आग मत भड़काएं। कुछ विकास की बात करें।

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