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साडा का मास्टर प्लान खाएगा दून की खेती
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 23 Feb 2015 01:24 PM IST
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देहरादून में खेती की जमीनें लीलने के बाद कंक्रीटों का जंगल अब शहर के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी खेतों को खत्म करने वाला है।
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दून घाटी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के प्रस्तावित नए मास्टर प्लान में आवासीय भूमि का दायरा बढ़ाने की संस्तुति की गई है। अगर इस प्लान को मंजूरी मिली तो साडा क्षेत्र में कृषि भूमि करीब दस हजार हेक्टेअर घट जाएगी।
खास बात यह है कि पिछले 14 साल में साडा के अधीन आने वाले क्षेत्रों में खेती की जमीन पहले ही करीब तीन हजार हेक्टेअर घट चुकी है। यही नहीं, इन क्षेत्रों में जलाशयों का दायरा भी दो हजार हेक्टेअर कम हो गया है। इसके बावजूद साडा के प्लान में आवासीय क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
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बोर्ड बैठक में रखा प्रस्ताव
हाल ही में हुई साडा की बोर्ड बैठक में मास्टर प्लान का प्रस्ताव रखा जा चुका है। इसमें कृषि भूमि के बड़े भाग पर आवासीय और वाणिज्यिक गतिविधियां शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। माना जा रहा है कि मार्च तक यह प्लान स्वीकृत हो सकता है।
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सर्वे हो चुका पूरा
साडा के अधीन आने वाले क्षेत्रों में मास्टर प्लान लागू करने पर नगर नियोजन विभाग काम कर रहा है। विभाग ने स्काट विल्सन कंपनी से हाल में साडा क्षेत्र में भूमि की स्थिति पर सर्वे कराया। सैटेलाइट मैपिंग के जरिये यह सर्वे पूरा हो चुका है।
...लेकिन वन बढ़ गए
सर्वे के मुताबिक 14 साल में साडा के क्षेत्र में खेती और जलाशयों का क्षेत्रफल घटा है, लेकिन वनों का दायरा बढ़ा है। वर्ष 2001 के मुकाबले वर्ष 2015 में जंगलों के क्षेत्रफल में करीब पांच हजार हेक्टेअर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
माफिया के कब्जे में जमीन
सर्वे में यह भी साफ हुआ है कि कृषि भूमि कम होने की वजह अवैध प्लाटिंग हैं। भूमाफिया ने ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से प्लाटिंग की हैं, जिनमें कृषि भूमि को आवासीय बताकर बेचा गया। अब इन खेतों पर नई कालोनियां विकसित हो चुकी हैं।
रिकार्ड रूप से बढ़ेगी आवासीय भूमि
मास्टर प्लान में सर्वाधिक भू-उपयोग आवासीय प्रस्तावित है। शहर के बाहरी कस्बों में अभी तक 1135 हेक्टेअर जमीन आवासीय है, लेकिन नए मास्टर प्लान में इसे नौ हजार हेक्टेअर करने का प्रस्ताव है।
यह भू-उपयोग कृषि भूमि को बदलकर ही मिलेगा। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में अभी 2899 हेक्टेअर आवासीय क्षेत्र को बढ़ाकर 4817 करना प्रस्तावित है।
सर्वे के आंकड़े
भू-उपयोग - क्षेत्रफल (2001) - क्षेत्रफल (वर्तमान)
कृषि - 35184.1 - 32172
जलाशय - 16468 - 14886
वन - 99382 - 104787
(क्षेत्रफल हेक्टेअर में)
मास्टर प्लान में कृषि क्षेत्र से जमीन लेने का प्रस्ताव
भू-उपयोग - मौजूदा क्षेत्रफल - प्रस्तावित
कृषि - 32172 - 2242
जलाशय - 14886 - 14886
वन - 104787 - 104792
औद्योगिक - 323 - 866
आवासीय
शहरी - 1135 - 9000
ग्रामीण - 2899 - 4817
(क्षेत्रफल हेक्टेअर में)
नए मास्टर प्लान में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कृषि भूमि का वजूद बचा रहे। हालांकि, विकास के लिए भू-उपयोग बदला जाएगा। उद्योगों के लिए जमीन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- जीसी गुणवंत, सचिव, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण
इसलिए बढ़ाना पड़ रहा दायरा
चूंकि शहर में जमीनों की कमी हो गई है। इसलिए लोग अब बाहरी क्षेत्रों में आवासीय कालोनियां बना रहे हैं। मास्टर प्लान नहीं होने की वजह से बाहरी क्षेत्रों (साडा के क्षेत्र) में धड़लल्ले से अनियोजित विकास हो रहा है।
अवैध प्लाटिंग की भी भरमार हो गई है। साडा के पास कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के आवेदन भी लोग खूब कर रहे हैं। इस वजह से साडा को मास्टर प्लान लाना पड़ा रहा है।