शहीद पिता के जज्बे पर नाज है इन्हें
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रुड़की के आदर्श शिवाजी निवासी शहीद मानसिंह गुसाईं के बेटे उम्मेद सिंह और दो बेटिया ममता और कविता उस समय बहुत छोटे थे जब उनके पिता कारगिल में दुश्मनों का मुकाबला करते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए शहीद हो गए।
पिता की यादों के सहारे जीवन की कठिन डगर पर आगे बढ़ रहे तीनों बच्चों को अपने पिता के जज्बे पर नाज है।
दोनों बहनों की पढ़ाई लिखाई के साथ ही बीमार मां की जिम्मेदारी संभालने वाले उम्मेद सिंह ने बीकॉम तक पढ़ाई पूरी कर ली है और वे एक काबिल सीए बनना चाहते हैं।
उनकी इच्छा तो वैसे फौज में जाकर पिता की तरह जांबाज सैनिक बनने की थी लेकिन परिवार की देखरेख की जिम्मेदारी के चलते वह ऐसा नहीं कर सके।
गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे मान सिंह
उम्मेद ने बताया कि कारगिल युद्ध के समय 18 गढ़वाल राइफल्स के जवान के रूप में बिहार में तैनात थे। वहां से उनकी बटालियन मोर्चा लेने के लिए कश्मीर गई। जहां उनके पिता ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
उस समय उम्मेद सात वर्ष के थे जबकि एक बहन दो साल व दूसरी बहन कुछ महीने की ही थी। परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग से तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई लिखाई की राह आसान हो गई।
एक बहन ने इंटर पास कर लिया है जबकि दूसरी इंटर में हैं। तीनों ही पढ़ लिखकर ऐसा कोई काम करना चाहते हैं जिससे अपने पिता का नाम रोशन कर सके।
उम्मेद ने बताया कि सेना का उन्हें अभी भी परिवार के सदस्यों की तरह ही पूरा प्यार और सहयोग मिल रहा है। मां उमा देवी के इलाज से लेकर भाई बहनों की पढ़ाई व अन्य समस्याओं के समाधान के लिए गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों ने सहयोग दिया है।