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अंतिम यात्रा से पहले शहीद मेजर चित्रेश के पिता बोले, शादी की नहीं बेटे की शहादत की बरात निकली

Mon, 18 Feb 2019 08:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 18 Feb 2019 08:37 PM IST
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Martyr Major Chitresh Father talked about his son
martyr major chitresh bisht

पिता एसएस बिष्ट बेटे मेजर चित्रेश के पार्थिव शरीर के ताबूत से लिपटकर काफी देर तक बिलखते रहे। रिश्तेदारों की तरफ इशारा करते हुए बोले, लो निकल गई बेटे की बरात। शादी की बरात तो नहीं निकली, लेकिन शहादत की बरात जरूर निकल गई। मां रेखा और बड़ा भाई नीरज भी छोटे भाई चित्रेश को याद कर तड़पते रहे।

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बेटे चित्रेश बिष्ट की शनिवार शाम शहादत की खबर के आने के बाद से पूरा परिवार गम में डूबा है। इन दिनो परिवार चित्रेश की सात मार्च को प्रस्तावित शादी की तैयारियों में जुटा था। पिता एसएस बिष्ट अधिकांश रिश्तेदारों को कार्ड बांट चुके थे। ब्रिटेन में रहने वाला बड़ा भाई नीरज बिष्ट भी चित्रेश की शादी में भाग लेने के लिए देहरादून आने की तैयारी में था। चित्रेश की शहादत ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
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नेहरू कालोनी के बाजार रहे बंद, सड़काें पर जताया आक्रोश

पिता काफी दिनों से चित्रेश पर छुट्टी पर आने का दबाव बना रहे थे, लेकिन शायद होनी को यही मंजूर था। मां बेटे को याद कर रोती रही, तुम कहां चले गए। मां से जो वादा करके गए थे, उसे अब कौन पूरा करेगा। भाई नीरज बिष्ट का कहना था कि वो तो परिवार के साथ सोनू (चित्रेश) की शादी की आने की तैयारी में थे, लेकिन वो राष्ट्र की रक्षा में वीरगति को प्राप्त हो गया। भाई तुझ पर पूरे परिवार को गर्व है। तेरा बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

मेजर चित्रेश बिष्ट की शहादत के सम्मान में सोमवार को आसपास के बाजार बंद रहे। सुबह से ही आसपास के लोगाें का बिष्ट के आवास पर आने का सिलसिला शुरू हो गया था। चित्रेश की अंतिम यात्रा हरिद्वार रवाना होने के बाद इलाके के लोगों ने सड़कों पर उतर पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। यह तमाम लोग फिर से चित्रेश के आवास पर पहुंच गए, जहां पर वे काफी देर तक चित्रेश अमर रहे के उद्घोष करते रहे। बाद में इन लोगाें ने नेहरू कालोनी स्थित शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।  

पिता बिष्ट को वापस लाए हरीश रावत

पिता एसएस बिष्ट बेटे चित्रेश के अंतिम संस्कार में भी हरिद्वार जाना चाहते थे। वो नाते-रिश्तेदार के साथ घर से निकल भी गए थे, लेकिन रास्ते में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने समर्थक के साथ उन्हें मिल गए। रावत उन्हें समझा-बुझाकर वापस घर ले आए, क्याेंकि उनकी तबीयत भी सही नहीं थी। बिष्ट को यह भी तर्क दिया गया कि जवान बेटे की मौत होने पर पिता अंतिम क्रिया में शामिल नहीं होते।

साथी की अंतिम विदाई पर फफक पड़े सैन्य अधिकारी
शहीद मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में सैन्य अफसर काफी संख्या में शामिल हुए। इनमें मेजर डीसी रमोला, गौरव तिवारी, अक्षय अरोरा, विपुल कोटनाला आदि मेजर चित्रेश के साथ रहे हैं। अंतिम यात्रा शुरू हुई तो यह सैन्य अधिकारी भी चित्रेश को याद कर रोने लगे। सैन्य अधिकारियों का कहना था कि चित्रेश बम और सुरंग को डिफ्यूज करने में एक्सपर्ट होने के साथ हर समय दूसरे की मदद को तैयार रहता था। ऐसा लगता है कि बारूदी सुरंग को रिमोट से उड़ाया गया है।
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