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पंचतत्व में विलीन हुए शहीद दीपक नैनवाल, अंतिम विदाई में नहीं दिखाई दिए स्थानीय नेता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 23 May 2018 07:36 AM IST
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deepak nainwal cremation
- फोटो : amar ujala
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जम्मू- कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से लोहा लेते हुए गोली लगने के चालीस दिन तक जिंदगी और मौत से लड़ते ह़ुए शहीद हुए उत्तराखंड के जाबांज दीपक नैनवाल की पार्थिव देह मंगलवार को खड़खड़ी स्थित श्मशान घाट पर पंचतत्व में विलीन हो गई।
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सेना के मान- सम्मान को लेकर बड़े- बड़े बयान देने वाले राजनीतिक दलों के नेता दूर- दूर तक दिखाई नहीं दिए। सत्तारुढ़ भाजपा से लेकर कांग्रेस का भी कोई पदधिकारी श्मशान घाट पर शहीद को अंतिम विदाई के लिए नहीं पहुंचा। अलबत्ता भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रदीप कालरा जरूर दिखाई दिए।
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जब तक सूरज चांद रहेगा दीपक तेरा नाम रहेगा के गगनभेदी नारों के बीच उनके तीन साल के मासूम बेटे वैभव ने अपने चाचा प्रदीप के साथ जब चिता को मुखाग्नि दी तो हर आंख नम हो गई। जिलाधिकारी दीपक रावत, प्रभारी एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने प्रशासन की ओर से अमर शहीद की पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित किए।
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दस अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के कुलगांव इलाके में आतंकियों के साथ करीब सत्रह घंटे तक चली मुठभेड़ में हर्रावाला देहरादून निवासी जाबांज नायक दीपक नैनवाल जख्मी हो गए थे। दीपक ने वर्ष 2001 में प्रथम महार रेजीमेंट से सेना की शुरुआत की थी। वह काफी समय से राष्ट्रीय रेजीमेंट का हिस्सा थे। करीब चालीस दिनों तक उपचाराधीन रहने के बाद बीस मई को दीपक का निधन हो गया था। मंगलवार को सिद्धपुरम, हर्रावाला स्थित आवास से उनकी शवयात्रा हरिद्वार पहुंची।
सैन्य सम्मान के साथ शोक सलामी देकर अंतिम विदाई दी
deepak nainwal cremation
- फोटो : amar ujala
सेना की टुकड़ी ने अपने अमर शहीद साथी को सैन्य सम्मान के साथ शोक सलामी देकर अंतिम विदाई दी। भारतमाता के इस अमर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी तादाद में देहरादून और गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों से लोग हरिद्वार पहुंचे थे। जिला प्रशासन की ओर से डीएम दीपक रावत, कार्यवाहक एसएसपी बरिंदरजीत सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार, एसपी सिटी ममता वोहरा, तहसीलदार सुनैना राणा समेत अनेक अधिकारियों ने पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित किए।
तीन साल के मासूम बेटे वैभव के हाथों शहीद के भाई प्रदीप नैनवाल ने चिता को मुखाग्नि दिलवाई। शहीद के पिता चक्रधर नैनवाल के अलावा साले नवीन कुमार और शहीद की मासूम बेटी लावन्या, सांसद प्रतिनिधि संजय सिंह चौहान, भाजपा नेता राजपाल रावत, भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भपलियाल, प्रधान राजकुमार सहित बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार और अन्य लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
सेना को छूट मिले तो मिट जाएगा पाक का वजूद
बेटे दीपक नैनवाल की शहादत पर गर्व करते हुए पिता पूर्व सैन्यकर्मी चक्रधर नैनवाल ने कहा कि उनका बेटा देश के काम आया, उसकी शहादत पर उन्हें गर्व है। बेटे ने अपनी मां की गोद को गौरवान्वित किया है। उसकी शहादत प्रेरणा का कार्य करेगी। खड़खड़ी श्मशान घाट पर पत्रकारों से बातचीत में शहीद के पिता पूर्व सैनिक चक्रधर नैनवाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें पाकिस्तान की हरकत का जवाब देना चाहिए।
भारतीय सेना पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने में समक्ष है, लेकिन कुछ वजह होंगी कि सेना के हाथ बंधे है। उन्होंने कहा कि सेना को छूट मिले तो पाकिस्तान का दुनिया के नक्शे से नामो निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बड़ा बहादुर था। शुरू से ही उसे सेना में शामिल होने का जुनून था। गोली लगने के बाद वह चालीस दिन तक मौत से जूझता रहा। उनका परिवार जब उससे मिलने अस्पताल गया तब उसने हम सबको भी ढांढस बंधाया। उसकी शहादत से परिवार का हर सदस्य गौरवान्वित है।
तीन साल के मासूम बेटे वैभव के हाथों शहीद के भाई प्रदीप नैनवाल ने चिता को मुखाग्नि दिलवाई। शहीद के पिता चक्रधर नैनवाल के अलावा साले नवीन कुमार और शहीद की मासूम बेटी लावन्या, सांसद प्रतिनिधि संजय सिंह चौहान, भाजपा नेता राजपाल रावत, भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भपलियाल, प्रधान राजकुमार सहित बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार और अन्य लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
सेना को छूट मिले तो मिट जाएगा पाक का वजूद
बेटे दीपक नैनवाल की शहादत पर गर्व करते हुए पिता पूर्व सैन्यकर्मी चक्रधर नैनवाल ने कहा कि उनका बेटा देश के काम आया, उसकी शहादत पर उन्हें गर्व है। बेटे ने अपनी मां की गोद को गौरवान्वित किया है। उसकी शहादत प्रेरणा का कार्य करेगी। खड़खड़ी श्मशान घाट पर पत्रकारों से बातचीत में शहीद के पिता पूर्व सैनिक चक्रधर नैनवाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें पाकिस्तान की हरकत का जवाब देना चाहिए।
भारतीय सेना पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने में समक्ष है, लेकिन कुछ वजह होंगी कि सेना के हाथ बंधे है। उन्होंने कहा कि सेना को छूट मिले तो पाकिस्तान का दुनिया के नक्शे से नामो निशान मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बड़ा बहादुर था। शुरू से ही उसे सेना में शामिल होने का जुनून था। गोली लगने के बाद वह चालीस दिन तक मौत से जूझता रहा। उनका परिवार जब उससे मिलने अस्पताल गया तब उसने हम सबको भी ढांढस बंधाया। उसकी शहादत से परिवार का हर सदस्य गौरवान्वित है।