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मंडी समिति दोगुना करेगी अपनी दुकानों का किराया

Wed, 14 Oct 2020 01:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2020 01:00 AM IST
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Market committee will double the rent of its shops
देहरादून। मंडी समिति अपनी आय बढ़ाने के लिए दुकानों का किराया दोगुना करने जा रही है। इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों से सरचार्ज, धर्मकांटा से टैक्स वसूलने और नई उप मंडियां व स्टोरेज सेंटर खोलने की तैयारी है। मंडी समिति की ओर से जल्द ही इसका प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
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निरंजनपुर मंडी कार्यालय में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में अध्यक्ष राजेश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडी शुल्क खत्म होने के बाद मंडी के पास आय के साधन नहीं रह गए हैं। इसलिए मौजूदा संसाधनों से ही आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मंडी समिति में कर्मचारियों के वेतन व अन्य सुविधाओं पर करीब 35 लाख रुपये महीने का खर्च आता है। अब तक इनमें से करीब 22 लाख रुपये मंडी शुल्क के रूप में मिलता था, जो अब पूरी तरह बंद हो गया है। ऐसे में मंडी को चलाने के लिए आय के दूसरे साधनों को विकसित किया जा रहा है। वर्ष 1989 में मंडी निर्माण के बाद से आज तक दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। अभी ए ग्रेड की दुकान का 1140, बी ग्रेड का 920, सी ग्रेड का 200 और डी ग्रेड का 150 रुपया महीना किराया लिया जा रहा है। इसी किराये में सभी तरह की मेंटेनेंस भी मंडी समिति ही करती है।
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कई उप मंडियां और स्टोरेज सेंटर भी बनेंगे
देहरादून। मंडी समिति किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें घर के पास उत्पाद बेचने की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छोटी-छोटी उप मंडियां और स्टोरेज सेंटर भी बनाए जाएंगे। राजेश शर्मा ने बताया कि यहां किसानों को कोल्ड स्टोर और गोदाम की सुविधा भी मिलेगी। ठीक कीमत न मिलने की स्थिति में किसान अपना सामान यहां रख सकते हैं और जब सामान के दाम उन्हें ठीक मिलें तब बेच सकते हैं। अभी किसानों को ट्रांसपोर्ट के रूप में बहुत अधिक खर्च करना पड़ता है। घर के पास सुविधा मिलने से उनका यह खर्च बच जाएगा। वहीं, कई बार पहाड़ों पर सड़कें बंद होने के कारण उनका माल वाहन में ही पड़ा-पड़ा खराब हो जाता है। उप मंडी परिसरों को कृषि विकास केंद्रों के रूप में विकसित कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उप मंडी स्थल और स्टोरेज सेंटर के लिए सर्वे का काम चल रहा है। किसानों के लिए जो जगह सबसे बेहतर होगी, वहीं इनका निर्माण किया जाएगा।
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