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दो दिन में कोर्ट में सरेंडर करें मनीष वर्मा, नहीं तो होंगे गिरफ्तार: सुप्रीम कोर्ट
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धोखाधड़ी के आरोपी पूर्व दर्जाधारी मनीष वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुए दो दिन के भीतर मनीष वर्मा (पत्नी व भाई समेत) को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है। यदि उन्होंने सरेंडर नहीं किया तो विवेचना अधिकारी (आईओ) को वर्मा की गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में आठ सितंबर को सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के क्रम में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की कोर्ट ने 16 अगस्त को मनीष वर्मा, उनकी पत्नी व भाई की जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए थे, लेकिन 18 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के इस आदेश पर रोक लगाते हुए मनीष वर्मा की जमानत मंजूर कर दी थी। साथ ही कोर्ट ने पूरे मामले की पत्रावलियां तलब करते हुए सात सितंबर को सुनवाई मुकर्रर की थी। इस मुकदमे के वादी सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी अतुल कृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खांवलिंकर और जस्टिस संजीव खन्न की पीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून के इन आदेशों पर रोक लगा दी है। साथ ही मनीष वर्मा, उनकी पत्नी नीतू वर्मा व भाई संजीव वर्मा को दो दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। यदि, उन्होंने सरेंडर नहीं किया तो आईओ को उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं। आईओ इस गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट को भी बताएंगे।
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यह है मामला
सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी की शिकायत पर मनीष वर्मा, उनकी पत्नी व भाई के खिलाफ वर्ष 2012 में मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रस्ट को 100 बीघा जमीन बेचने का अनुबंध किया था, लेकिन मौके पर जमीन केवल 33 बीघा ही पाई गई। ऐसे में उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने करीब 67 बीघा जमीन के कागजात फर्जी दर्शाए थे।
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2014 में हुई थी चार्जशीट
2014 में इस मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था। इस बीच वादी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुकदमे के जल्द विचारण की अपील की थी। आरोप है कि इस सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष यानी वर्मा परिवार कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ था। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि अभियोजन वर्मा व उनकी पत्नी और भाई की जमानत निरस्तीकरण का प्रार्थनापत्र कोर्ट में प्रस्तुत करें। इन आदेशों के क्रम में ही एसीजेएम तृतीय की कोर्ट ने 16 अगस्त को आदेश पारित किए थे।
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गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के क्रम में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की कोर्ट ने 16 अगस्त को मनीष वर्मा, उनकी पत्नी व भाई की जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए थे, लेकिन 18 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के इस आदेश पर रोक लगाते हुए मनीष वर्मा की जमानत मंजूर कर दी थी। साथ ही कोर्ट ने पूरे मामले की पत्रावलियां तलब करते हुए सात सितंबर को सुनवाई मुकर्रर की थी। इस मुकदमे के वादी सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी अतुल कृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खांवलिंकर और जस्टिस संजीव खन्न की पीठ ने जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून के इन आदेशों पर रोक लगा दी है। साथ ही मनीष वर्मा, उनकी पत्नी नीतू वर्मा व भाई संजीव वर्मा को दो दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। यदि, उन्होंने सरेंडर नहीं किया तो आईओ को उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं। आईओ इस गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट को भी बताएंगे।
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यह है मामला
सुभारती ट्रस्ट के ट्रस्टी की शिकायत पर मनीष वर्मा, उनकी पत्नी व भाई के खिलाफ वर्ष 2012 में मुकदमा दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने ट्रस्ट को 100 बीघा जमीन बेचने का अनुबंध किया था, लेकिन मौके पर जमीन केवल 33 बीघा ही पाई गई। ऐसे में उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने करीब 67 बीघा जमीन के कागजात फर्जी दर्शाए थे।
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2014 में हुई थी चार्जशीट
2014 में इस मामले में आरोपपत्र भी दाखिल किया गया था। इस बीच वादी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुकदमे के जल्द विचारण की अपील की थी। आरोप है कि इस सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष यानी वर्मा परिवार कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ था। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिए थे कि अभियोजन वर्मा व उनकी पत्नी और भाई की जमानत निरस्तीकरण का प्रार्थनापत्र कोर्ट में प्रस्तुत करें। इन आदेशों के क्रम में ही एसीजेएम तृतीय की कोर्ट ने 16 अगस्त को आदेश पारित किए थे।