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आदमखोर बाघिन उत्तराखंड बॉर्डर पर दिखी

Sun, 12 Jan 2014 08:58 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 12 Jan 2014 08:58 AM IST
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man eater tigress at uttarakhand border

उत्तर प्रदेश में आतंक मचाने के बाद अब आदमखोर बाघिन उत्तराखंड की सीमा तक पहुंच गई है। शुक्रवार को साढ़े तीन बजे के आसपास बाघिन को बिजनौर के अफजलगढ़ के आसपास देखा गया है।

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इस सूचना के बाद जंगलात महकमा सतर्क हो गया है। प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक/प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव एसएस शर्मा ने मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं और निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व को बाघिन को ट्रैंकुलाइज करने का निर्देश दिया है, जिससे उसे बचाया जा सके।
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मुरादाबाद से लेकर बिजनौर तक आतंक
पिछले कई दिनों से मुरादाबाद से लेकर बिजनौर तक में बाघिन ने आतंक मचा रखा है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के जंगलों से भटक कर बाघिन मुरादाबाद पहुंच गई थी।
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भूख लगने पर उसने आदमी को शिकार बनाना शुरू कर दिया। अब तक वह कई लोगों को अपना निवाला बना चुकी है। इस समय वह तेजी से उत्तराखंड की ओर बढ़ रही है।

रात में कर सकती है प्रवेश
आशंका जताई जा रही है कि वह शुक्रवार रात में ही प्रदेश के जंगल में प्रवेश कर सकती है। हालांकि उस पर पैनी नजर रखने के लिए कुमाऊं के वन कर्मियों और कार्बेट टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों को आदेश दिया गया है।

यदि वह आबादी के आसपास नजर आती है तो उसे तत्काल ट्रैंकुलाइज करने के लिए संबंधित अधिकारियों को कहा गया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एसएस शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में कोई अनहोनी न होने पाए इसलिए बाघिन पर नजर रखी जा रही है।

मारने के लिए शिकारी बुलाए गए
बाघिन ने शुक्रवार की शाम को एक व्यक्ति को अपना छठा शिकार कर डाला। उसने गन्ने के खेत में काम कर रहे एक युवक को मारकर उसका शव अपने साथ लेते गई। इसके बाद वन्य जीव प्रतिपालक ने बाघिन को मारने के लिए तीन शिकारियों को बुला लिया है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
चंदौसी जहां पर बाघिन ने किसी बच्चे को अपना पहला निवाला बनाया, वहां पर दूर-दूर तक कोई जंगल नहीं है। भोजन की तलाश में उसने एक बच्चे को मार दिया, जिसके बाद से उसे आदमी को मारने के लिए आसानी हो गई। इसी का नतीजा है कि एक के बाद एक आदमी को वह बाघिन अपना शिकार बना रही है। अब उसे आदमखोर घोषित करके तत्काल प्रभाव से मार देना चाहिए।
-एएस नेगी, पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड

बाघिन जंगल से भटककर मैदानी क्षेत्र में पहुंच गई है, जहां की खेतीबाड़ी है। वहां बाघिन के आहार के लिए कुछ भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उसने मानव को शिकार बनाया, जिसके बाद से आदमी को शिकार करना उसके लिए आसान हो गया है। यहीं कारण है कि वह लगातार आदमी को अपना निवाला बना रही है। ऐसी स्थिति में बाघिन को पकड़ने के बजाय उसे मारना सबसे अधिक बेहतर होगा।
-डा.विभाष पांडव, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून

आदमखोर घोषित करने की क्या है प्रक्रिया
किसी क्षेत्र विशेष में गुलदार, बाघ या बाघिन ने यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों को अपना निवाला बना लिया। उस स्थिति में उस क्षेत्र के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) की ओर से उसे आदमखोर घोषित करने के लिए राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को संस्तुति की जाती है।

उस संस्तुति के आधार पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की ओर से उस वन्यजीव को आदमखोर घोषित किया जाता है। उसी आधार पर उसे महकमे के लाइसेंसी शिकारी द्वारा मार दिया जाता है।

कैसे बनते हैं आदमखोर
दरअसल बाघ, बाघिन या गुलदार दो परिस्थितियों में आदमखोर हो जाते है। पहला यह है कि वह बूढ़ा हो जाए। उस स्थिति में उसके दांत टूट जाते हैं। नाखून भी टूट जाते हैं, जिसके कारण वह हिरन, सुअर या किसी अन्य वन्यजीव का शिकार नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में आदमी को शिकार करना उसके लिए आसान हो जाता है, जिसके कारण वह आदमखोर हो जाते है।


दूसरा यह कि जंगल से बाहर आने की स्थिति में उसके लिए जब आहार के लिए कुछ नहीं होता। उस स्थिति में यदि गलती से भी वह आदमी का शिकार कर लिया तो फिर वह आदमखोर हो जाता है।

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