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न्यूयार्क के म्यूजियम से आई महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति कहीं भारत के इस मंदिर की धरोहर तो नहीं!

Thu, 06 Sep 2018 04:41 PM IST
आनंद बिष्ट, अमर उजाला, गरुड़ (बागेश्वर)
आनंद बिष्ट, अमर उजाला, गरुड़ (बागेश्वर) Updated Thu, 06 Sep 2018 04:41 PM IST
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Mahishasura Mardini Statue from the New York museum is in dispute
new york museum - फोटो : file photo

न्यूयॉर्क के मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट से हाल ही में भारत लाई गईं महिषासुर मर्दिनी की बहुमूल्य मूर्ति कहीं बैजनाथ के चक्रवृतेश्वर मंदिर से तो नहीं चुराई गई थी, इस आशंका के चलते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग मूर्ति के बारे में जानकारी जुटा रहा है।

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न्यूयॉर्क मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के अधिकारी भारत की ऐतिहासिक धरोहर महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति को अपने खर्च पर 10 अगस्त को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली को सौंप गए थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून की अधीक्षक लीली धस्माना और पुरातत्वविद डॉ. राजीव पांडे ने भी इसकी तस्दीक की है। उन्होंने कहा कि मूर्ति बैजनाथ के चक्रवृतेश्वर मंदिर से चुराई गई है या फिर कहीं और से, इसका पता लगाया जा रहा है।
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प्रोफेसर केपी नौटियाल ने 1969 में लिखी पुस्तक आर्कियोलॉजी ऑफ कुमाऊं में बैजनाथ के च्रकवृतेश्वर मंदिर में महिषासुर मर्दिनी के मूर्ति का जिक्र किया है। नौटियाल ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि मूर्ति पत्थर की है। उनके अनुसार मूर्ति 10वीं से 11वीं शताब्दी की है, जिसकी कीमत दो करोड़ से ज्यादा है। यह मूर्ति अब नदारद है। 

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एक कमरे में धूल फांक रहीं 128 दुर्लभ मूर्तियां

Mahishasura Mardini Statue from the New York museum is in dispute
baijnath temple

इतिहासविद् और गढ़सेर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल दत्त पाठक कहते हैं कि कत्यूर घाटी में भवन और सार्वजनिक स्थलों के निर्माण के दौरान साठ के दशक में कई मूर्तियां मिलीं।

रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने से चक्रवृतेश्वर आदि मंदिरों में रखीं मूर्तियां आज भी बिखरीं पड़ी हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि न्यूयॉर्क की ओर से भारत को लौटाई गई मूर्ति चक्रवृतेश्वर या फिर कत्यूर घाटी के किसी और मंदिर की हो सकती है। 

बैजनाथ निवासी बैजनाथ मंदिर समूह के मुख्य सचेतक भगवत गोस्वामी और मंदिर के महंत प्रकाश गिरि ने बताया कि बैजनाथ मंदिर के परिसर में संग्रहालय के अभाव में एक कमरे में 128 दुर्लभ मूर्तियां सालों से धूल फांक रहीं हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य मंदिर से 1975 में चोरों ने कुछ मूर्तियां चुरा लीं थीं जिन्हें राजस्व पुलिस ने बाद में बरामद कर लिया था।

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