{"_id":"693baa7f5371a2a5c50626bc","slug":"luminescence-dating-plays-an-important-role-in-understanding-geological-history-uttarakhand-news-in-hindi-2025-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: अब पहले की भूगर्भीय घटनाओं को जान भविष्य की कर सकते हैं तैयारी, ल्यूमिनिसेंस डेटिंग की अहम भूमिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: अब पहले की भूगर्भीय घटनाओं को जान भविष्य की कर सकते हैं तैयारी, ल्यूमिनिसेंस डेटिंग की अहम भूमिका
Fri, 12 Dec 2025 11:14 AM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Fri, 12 Dec 2025 11:14 AM IST
सार
वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक ने कहा कि पूर्व में बाढ़, भूकंप जैसी घटनाएं कब- कब हुई, उनको जानने के लिए ल्यूमिनिसेंस डेटिंग काफी मददगार है। ल्यूमिनिसेंस डेटिंग पर होने वाली कार्यशाला का उद्देश्य के बारे वैज्ञानिकों ने अपनी बात रखी।
विज्ञापन
कार्यशाला में अपनी बात रखते वैज्ञानिक
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद के वैज्ञानिक प्रो. अशोक सिंघवी ने कहा कि भूगर्भीय इतिहास को जानने में ल्यूमिनिसेंस डेटिंग की अहम भूमिका है। इस विधि से पुरातत्व से जुड़ी सटीक जानकारी मिल सकती है।
विज्ञापन
यह बात प्रो. सिंघवी ने वाडिया संस्थान में ल्यूमिनिसेंस डेटिंग पर चल रही कार्यशाला के दूसरे दिन उद्घाटन सत्र में कही। उन्होंने ल्यूमिनिसेंस डेंटिंग उद्भव, वर्तमान और भविष्य विषय पर व्याख्यान के दौरान ल्यूमिनिसेंस सिग्नलों, विधियों आदि के बारे में जानकारी दी। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक विनीत गहलोत ने कहा कि पूर्व में बाढ़, भूकंप जैसी घटनाएं कब- कब हुई, उनको जानने के लिए ल्यूमिनिसेंस डेटिंग काफी मददगार है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें...Earthquake: भूकंप आया तो आपस में मिल जाएंगी दाबका और कोसी नदी, बहाव क्षेत्र बदलाव; विशेषज्ञों ने ये वजह भी बताई
विज्ञापन
पूर्व की घटनाओं, पैटर्न को समझ कर ही भविष्य के लिए कदम उठा सकते हैं। डॉ. माधव मुरारी ने ल्यूमिनिसेंस डेटिंग पर होने वाली कार्यशाला का उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिक जावेद मलिक ने पुराने भूकंपों को जानने में इस विधि के महत्व पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्र में प्रो. विमल सिंह, डॉ. संदीप पांडा, जयेश मुखर्जी, डॉ. पूनम बहल, डॉ. महेश बदनल, अरबाज पठान, अक्षय कुमार, डॉ. अतुल सिंह, मो. शाहरुख ने भी अध्ययन को साझा किया। शोधार्थियों पोस्टरों को भी एक पोस्टर-दीर्घा में प्रदर्शित किया गया।