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उत्तराखंड: अब निचली अदालतें भी आरोपियों को दे सकेंगी अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश

Fri, 21 Sep 2018 08:00 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 21 Sep 2018 08:00 AM IST
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Lower courts will give Anticipatory bail to criminal after uttarakhand high court order
हाईकोर्ट - फोटो : demo pic

अब निचली अदालतें भी अग्रिम जमानत दे सेकेंगी। हाईकोर्ट ने राज्य में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 को प्रभावी बना दिया है। इससे राज्य में किसी भी अपराध के बाद आरोपियों को अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट नहीं आना पड़ेगा। कई राज्यों ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 को प्रभावी बनाया है, मगर उत्तराखंड अब तक इसमें शामिल नहीं था।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ में याची विष्णु सहाय ने स्पेशल अपील दायर कर सीआरपीसी (उत्तर प्रदेश संशोधन अधिनियम 1976) के सेक्शन नौ को चुनौती दी थी।
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इस संशोधन में उत्तर प्रदेश ने अग्रिम जमानत के प्रावधान से संबंधित सीआरपीसी में धारा 438 को प्रभावी नहीं माना था। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी उत्तर प्रदेश की व्यवस्था को अपनाए रखा।
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याची के मुताबिक पुनर्गठन अधिनियम में यह स्पष्ट प्रावधान था कि दो साल के अंदर नवगठित राज्य गठन से पहले के कानून का संशोधन कर सकती है। उत्तराखंड में फिर भी यह नहीं किया गया। 

 निचली अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर अंतरिम जमानत ले सकेंगे

कोर्ट को सरकार की ओर से बताया गया कि सरकार के समक्ष यह मामला विचाराधीन है। न्यायालय ने माना कि यह मामला जनहित से संबंधित है। कोर्ट ने यह भी माना कि उत्तराखंड राज्य ने यूपी के बनाये उस कानून को अंगीकृत नहीं किया है। इसलिए इसे उत्तराखंड पर लागू नहीं किया जा सकता। अत: अग्रिम जमानत संबंधी दंड प्रक्रिया के प्रावधान उत्तराखंड में प्रभावी  होंगे।  

अधिवक्ताओं के मुताबिक अब तक किसी भी प्रकृति के अपराध में आरोपित को गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी लगानी पड़ती थी। अब पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद कोई भी आरोपित  निचली अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर अंतरिम जमानत ले सकता है।

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