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उत्तराखंड विस: सदन की कार्यवाही के दौरान इस मामले पर गुस्सा गए स्पीकर, सख्त लहजे में दिए निर्देश

Thu, 20 Sep 2018 10:52 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 20 Sep 2018 10:52 AM IST
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Loudspeakers of religious places will be controlled after new guidelines in uttarakhand
trivendra singh rawat

खुले स्थान पर लीसा रखने के सवाल पर वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के जवाब से न सदस्य संतुष्ट हुए और न ही स्पीकर प्रेम चंद्र अग्रवाल। स्पीकर ने सख्त लहजे में कहा-‘यह गंभीर मामला है। सरकार प्रश्नों का संवेदनशील उत्तर दे। स्पीकर यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने इस मामले में अफसरों का उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। 

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पीठ के निर्देश से असहज हुए वन मंत्री ने मामले का परीक्षण कराने का आश्वासन सदन को दिया। मंत्री ने कहा-परीक्षण में खुले में लीसा रखने की बात सही पाई गई, तो संबंधित क्षेत्र के डीएफओ पर कार्रवाई होगी। प्रश्नकाल में बुधवार को सल्ट विधायक सुरेंद्र सिंह जीना यह मामला लेकर आए। उन्होंने अपने तारांकित प्रश्न में सरकार से पूछा था कि क्या ज्वलनशील पदार्थ लीसा निरीक्षण भवनों में खुले में रखा जा रहा है। इसका लिखित जवाब वन मंत्री ने ना में दिया था। अपनी ही सरकार के मंत्री को घेरते हुए जीना ने आरोप लगाया कि गलत जवाब दिया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र सल्ट के अंतर्गत मालीना के निरीक्षण भवन में तीन वर्षों से खुले में लीसा रखा गया है। इससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। जवाब में वन मंत्री ने कहा कि कहीं भी खुले में लीसा नहीं रखा गया है। इस पर स्पीकर ने हस्तक्षेप किया और सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी दी गई है, तो उसे संशोधित किया जाए। स्पीकर की टिप्पणी के सामने आने पर कांग्रेस ने सदन में शेम-शेम के नारे लगाए।
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एक दिन पहले ही मैंने अफसरों से इस संबंध में जानकारी ली थी। मुझे ये ही बताया गया कि खुले में कहीं लीसा नहीं रखा गया है। इस पूरे मामले का परीक्षण करा रहा हूं। शिकायत सही पाई गई, तो संबंधित डीएफओ पर कार्रवाई होगी।

-डॉ. हरक सिंह रावत, वन मंत्री

धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों को भी नियंत्रित

ध्वनि प्रदूषण की बढ़ती समस्या से निबटने के लिए सरकार अब धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों को भी नियंत्रित करने जा रही है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थलों, शादी-ब्याह और अन्य अवसरों पर होने वाले शोर-शराबे को भी नियंत्रित करने का सरकार ने इरादा जाहिर किया है। 


विधानसभा सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि सरकार धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकरों को भी नियंत्रित करने जा रही है। मूल प्रश्न भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने पूछा था। इसके जवाब में मंत्री ने विभिन्न शहरों में ध्वनि प्रदूषण पर किए गए अध्ययन को सामने रखा था। मंत्री ने बताया कि पिछले तीन सालों में विभिन्न शहरों में ध्वनि की तीव्रता सामान्यत: स्वीकार्य सीमा से अधिक पाई गई है। अनुपूरक प्रश्न भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान ने लगाया था, जिसके जवाब में मंत्री ने धार्मिक स्थलों समेत सार्वजनिक स्थानों पर बजने वाले लाउडस्पीकरों, डीजे आदि की ध्वनि को नियंत्रित करने की बात कही।

स्वीकार्य ध्वनि मात्रा (डेसिबल में)
वाणिज्य क्षेत्र-65, आवासीय क्षेत्र-55, शांत क्षेत्र-50

विभिन्न वर्षों में रिकार्ड की गई मापें (न्यूनतम-अधिकतम)
परिक्षेत्र           2016          2017            2018
वाणिज्य       51.3-74.8       48.6.-76.0     50.1-76.0
आवासीय      51.2-63.0       49.4-67.1     52.0-55-0

दून न बने दिल्ली, ठोस कदम जरूरी
सरकार ने दून में ध्वनि प्रदूषण की भयावह होती स्थिति पर चिंता जताई है। सरकार ने सदन में कहा-ठोस कदम उठाए जाने जरूरी है, ताकि दून न दिल्ली न बने। सरकार के अनुसार, हाल ही में दून के कुछ स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण मापा गया। घंटाघर पर 72.4 और सीएमआई चौक पर 70.8 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण पाया गया है, जबकि आदर्श स्थिति 65 डेसिबल है।



ध्वनि प्रदूषण हर जगह बढ़ रहा है। सरकार इसे लेकर चिंतित है। सरकार चाहती है कि धार्मिक स्थलों समेत अन्य सभी जगहों पर 65 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि का प्रसार न हो। इसके लिए सरकार गाइडलाइन तैयार करेगी।
-डॉ. हरक सिंह रावत, पर्यावरण मंत्री

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