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भगवान बलभद्र के अभिषेक को उमड़े श्रद्धालु
मसूरी/विकासनगर/ब्यूरो
Updated Sat, 17 Aug 2013 08:54 PM IST
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मसूरी के बिन्हार क्षेत्र स्थित भद्रराज देवता के मंदिर में शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र की मूर्ति का दूध, दही और मक्खन से अभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने परिवार और मवेशियों की खुशहाली की मन्नतें मांगी। मेले में मसूरी, विकासनगर, जौनपुर, सहारनपर, जौनसार बावर आदि इलाकों के सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। इस मौके पर दंगल का आयोजन भी किया गया।
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शनिवार शाम को दो दिवसीय भद्रराज मेले का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल और पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने किया। मान्यता है कि सदियों पहले इस स्थान पर भगवान बलभद्र ने लंबे समय प्रवास किया। सावन की पूर्णिमा और भाद्रपद के पहले दिन यहां पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
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मंदिर के आसपास की पहाड़ियों पर दूर-दूर तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। मंदिर से कलकल करती यमुना नदी और सामने हिमालय के साक्षात दर्शन होते हैं। दून और अगलाड घाटी का मनोहारी दृश्य यहां देखते ही बनता है। मुख्य पुजारी मोहनलाल ने सुबह भगवान बलभद्र की मूर्ति का स्नान करवाकर पूजा अर्चना की। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष बलवीर सिंह चौहान, बलवंत सिंह, कुंदन सिंह पंवार, मातबर सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
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दूध और मक्खन से होता है अभिषेक
मान्यता है कि एक बार एक राक्षस ने ग्रामीणों के पशुओं को मारना शुरू कर दिया। इस संकट से ग्रामीणों को निजात दिलाने के लिए भगवान बलभद्र ने यहां पहुंचकर राक्षस का वध किया। इसके बाद ग्रामीणों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। तब से सावन मास की समाप्ति पर हर साल यहां दो दिवसीय मेला आयोजित होता है। जिसमें भगवान बलभद्र की दूध व मक्खन से पूजा की जाती है।
खंडित मूर्ति का इतिहास
भद्रराज देवता के वजीर श्रीपाल तोमर बताते हैं कि एक बार शिकार पर निकले एक अंग्रेज ने यहां पहुंचकर ग्वालों से दूध मांगा। उस समय ग्वाले भगवान बलभद्र की दूध मक्खन से पूजा कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने दूध देने से मना कर दिया। इससे क्रोधित अंग्रेज ने भगवान की मूर्ति खंडित कर दी।
अंग्रेज के घर पहुंचते ही अचानक ब्रजपात हुआ, जिसमें वह और उसके पुत्र की मौत हो गई। उसकी पत्नी लेडी हुड ने स्थानीय लोगों से इसका कारण जाना तो उसने मंदिर पहुंचकर भगवान से माफी मांगी। आज भी मंदिर के समीप ही एक पत्थर पर लेडी हुड का नाम अंकित है। यह वाक्या 1814 का बताया जाता है।
पहाड़ों की रानी पर्यटकों से गुलजार
मसूरी। स्वतंत्रता दिवस पर नगर में उमड़ी पर्यटकों की भीड़ से नगर के व्यापारियों और होटलियर्स के चेहरे खिल उठे। छुट्टी के बाद भी नगर में पर्यटकों की खूब चहल-पहल बनी है। शनिवार को कई स्कूलों की आउटिंग से मालरोड गुलजार रही। उत्तराखंड में आई आपदा के बाद से नगर में सैलानियों की आवाजाही पर ब्रेक लग गया था। लेकिन अगस्त से सैलानियों की आमद बढ़ने लगी है। पर्यटन के जानकारों का कहना है कि सैलानी पहाड़ों का रुख करने लगे हैं।
मंदिर क्षेत्र में सुविधाओं की दरकार
हजारों लोगों की आस्था का केंद्र होने के बाद भी भद्रराज मंदिर सरकारी उपेक्षा का शिकार है। आज भी मंदिर तक पहुंचने के लिए मोटर मार्ग का निर्माण नहीं हो सका है। इसी के साथ मंदिर में पानी और बिजली की भी व्यवस्था नहीं है। भद्रराज मंदिर नव निर्माण समिति के सचिव डीएस पुंडीर ने बताया कि मेले के दौरान मंदिर समिति को खच्चरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है।