300 करोड़ के घोटाले में आरोपी इस अधिकारी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी, SC तक पहुंचा मामला
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300 करोड़ के घोटाले के आरोप में निलंबित इस अधिकारी के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
भूमिगत एसएलओ डीपी सिंह पर शिकंजा कसते हुए एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल कर दी है। विदेश भागने की आशंका के चलते पुलिस ने उसका लुक आउट नोटिस भी जारी कर दिया है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें दिल्ली में कईं जगहों पर दबिशें दे रही हैं।
हाइकोर्ट से शनिवार को गिरफ्तारी पर लगी रोक हटने के बाद से ही डीपी सिंह मोबाइल बंद कर परिवार के साथ भूमिगत हैं। पुलिस ने पैतृक घर सहित विभिन्न जगहों पर ताबड़तोड़ दबिशें दी, लेकिन वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े।
हाइकोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद डीपी के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर गिरफ्तारी पर स्थागनादेश लेने की आशंका पर जांच अधिकारी स्वतंत्र कुमार ने शासन से अनुमति लेने के बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल कर दी है।
इसका फायदा यह होगा कि अगले तीन महीने तक अगर डीपी सुप्रीम कोर्ट में स्टे के लिए अपील दायर करता है तो कोर्ट से इसकी सूचना एसआईटी को भी दी जाएगी। कोर्ट स्टे देने से पहले एसआईटी का पक्ष भी सुनेगी।
सितारगंज के काश्तकार ने कबूली 56 लाख कमीशन की बात
डीपी के परिवार के साथ विदेश भागने की आशंकाओं के चलते मंगलवार को डीपी सिंह का पासपोर्ट नंबर मिलने के बाद उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी कर दिया गया है। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि डीपी सिंह की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी उसके छिपने के संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दे रही है।
सितारगंज के काश्तकार ने कबूली 56 लाख कमीशन की बात
एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले में करोड़ों का मुआवजा लेने वाले काश्तकार भी अब खुलकर सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सोमवार को अपने बयान दर्ज करने पहुंचे सितारगंज के एक काश्तकार ने बताया कि उसे मिले मुआवजे की रकम में से उसने 56 लाख एक अफसर को कमीशन के रूप में देने की बात कबूली थी।
कुछ दिन पूर्व बाजपुर के एक काश्तकार ने भी इसी अफसर पर मुआवजा दिलाने की एवज में 50 लाख रुपयों का कमीशन मांगने का खुलासा किया था। लेकिन कमीशन नहीं देने पर उसका मुआवजा भी रोका गया था। काशीपुर और जसपुर तहसील के भी कुछ काश्तकारों ने एसआईटी को इस तरह के बयान दिये हैं। यह वहीं अफसर है जो एसआईटी के निशाने पर है। उसकी गिरफ्तारी को लेकर एसआईटी जुटी है।
एफएसएल को भेजा रिमांइडर
एसआईटी की जांच में 143 के दस्तावेजों में तत्कालीन अफसरों और तहसील कर्मियों के साथ ही कुछ काश्तकारों के फर्जी हस्ताक्षर मिले थे। जिनकी सत्यता जांचने के लिए एसआईटी ने जसपुर और काशीपुर तहसील के कुछ रजिस्टरों को जांच के लिए देहरादून फॉरेंसिक लैब में भेजा था। इनमें से अब तक एसआईटी को जसपुर तहसील का ही एक रजिस्टर मिल पाया है। माना जा रहा है कि एफएसएल से सभी रजिस्टर मिलने के बाद एसआईटी मामले में लिप्त अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई कर सकती है। इसके लिए एसआईटी ने मंगलवार को एफएसएल को जल्द जांच पूरी कर रजिस्टर भेजने के लिए रिमांडर भेजा है।