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क्या सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद लोकायुक्त पर जागेगी उत्तराखंड सरकार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Dec 2015 12:46 PM IST
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सरकार ने नहीं सुनी तो सर्वोच्च न्यायालय ने दो दिन पहले यूपी का लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी। इससे पहले न्यायालय की भृकुटियां तने, दिल्ली प्रदेश सरकार ने भी बुधवार को लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी।
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उत्तराखंड में भी आमल यही है। शायद सरकार भी न्यायालय की फटकार के इंतजार में है। राज्यपाल दो बार पत्र भेजकर लोकायुक्त के बारे में जवाब तलब कर चुके है, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया। कांग्रेस सरकार की पहले ही दिन से लोकायुक्त की नियुक्ति में दिलचस्पी नहीं थी।
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राज्यपाल भी दो पत्र भेजकर शासन को सचेत कर चुके, लेकिन नियुक्ति नहीं हुई। कांग्रेस सरकार ने पहले खंडूड़ी कालोकायुक्त खत्म किया, पिर अपने की भी सुध नहीं ली और एक्ट में नियुक्ति के लिए दी गई 180 दिन की बाध्यता भी खत्म कर डाली। 23 अक्टूबर 2013 को लोकायुक्त के पद से जस्टिस एमएम घिल्डियाल के सेवा निवृत होने के बाद से ही यह कुर्सी खाली है।
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अखबरों की कतरनों व सामाजिक पहरेदारों की चिट्ठी पतरी को आधार बनाकर राज्यपाल ने विगत 19 फरवरी को सरकार को पत्र भेजकर लोकायुक्त नियुक्त को लेकर अद्यतन स्थिति जाननी चाही थी, लेकिन सरकार सोयी रही।
मीडिया से बातचीत में भी सीएम यही कहते रहे कि केंद्र व दिल्ली प्रदेश सरकार के लोकायुक्तों की नियुक्ति देखकर ही अपने राज्य में पहल करेंगे। हालांकि सरकार का यह तर्क किसी के गले इसलिए नहीं उतर रहा है, क्योंकि राज्य में जो एक्ट लागू है वह यूपीए सरकार द्वारा पारित किया गया है।
पानी की तरह बह रहा पैसा
आयोग से चयनित अफसरों के अलावा समूग ग घ श्रेणी के लगभग 35 कर्मचारियों की पगार, भवन किराया आदि मद में हर महीने 8-10 लाख रुपए खर्च होते। यह खर्च इसलिए भी व्यर्थ है, क्योंकि लोकायुक्त के नहीं होने से किसी भी कार्य का संचालन नहीं होता है।
तारीखों के फेर में लोकायुक्त की कहानी
: भाजपा सरकार में अक्टूबर 2011 में विधानसभा से लोकायुक्त एक्ट पास हुआ
: इस एक्ट को 03 सितम्बर 2013 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी
: 09 सितम्बर 2013 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य को सूचना दी
: विधायी ने 24 सितम्बर 2013 को इसे प्रकाशन के लिए भेजा, सरकार ने रोक लगाई
: 17 नवम्बर 2013 को तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने सत्तारूढ़ दल के विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन तीन मंत्रियों समेत 16 विधायक नहीं आए। इस बैठक की खास बात यह थी उस समय हरीश गुट के विधायक नहीं आए
: बहुगुणा सरकार ने खंडूड़ी का लोकायुक्त निरस्त कर अपना लोकायुक्त बिल पास कराया जिसे राज्यपाल ने 26 फरवरी 2014 को मंजूरी दी
: 12 मई 2014 को लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए बीजापुर में हुई बैठक में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष, मुख्यमंत्री हरीश रावत, स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने एक विधिवेत्ता को सलेक्शन कमेटी में शामिल करने पर विचार विमर्श किया। सीएम ने लोकायुक्त की नियमावली तैयार करने को कहा। लेकिन उसकेबाद कुछ नहीं हुआ।
मौजूदा लोकायुक्त के अधिकार व शक्तियां
: लोकायुक्त का सचिव जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर का होगा
: सचिव की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से होगी
: काम प्रभावित ना हो इसलिए जांच व अभियोजन के दो अलग अलग निदेशक होंगे
: लोकायुक्त किसी भी मामले की जांच के लिए टीम गठित कर सकेगा
: प्रारंभिक जांच में लोकायुक्त की मदद केलिए एसडीएम स्तर के जांच अधिकारी होंगे
: लोकायुक्त का वेतन व भत्ते उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होंगे
: पद त्याग करने पांच साल तक लोकायुक्त या कोई सदस्य ना तो चुनाव लड़ सकेगा और ना ही सरकार से लाभ का पद लेगा
: किसी कारणवश अध्यक्ष का पद रिक्त होता है तो एक साधारण अधिसूचना से वरिष्ठ सदस्य को यह जिम्मेदारी दी जाएगी