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मिशन 2019: नामांकन के बाद अब ‘वोट कटवा’ दलों पर भाजपा-कांग्रेस की नजर

Tue, 26 Mar 2019 08:54 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 26 Mar 2019 08:54 PM IST
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Lok sabha elections 2019 bjp and congress leaders eye on independent candidates
भाजपा-कांग्रेस - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा कांग्रेस की नजर ‘वोट कटवा’ दलों और निर्दलियों पर है। दोनों प्रमुख दलों में कांटे की टक्कर के बीच वोट काटने वाले समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

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ऐसे में दोनों ओर के रणनीतिकार अपना वोट बैंक साधने के साथ छोटे दलों के समीकरण भी टटोल रहे हैं। वर्ष 2014 में कुल मतदान में अन्य दल व निर्दलियों की नौ फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रही थी।  
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राज्य गठन के बाद से लोकसभा चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और एक बार समाजवादी पार्टी के अलावा कोई अन्य दल या निर्दलीय पहले दो स्थानों पर नहीं रहा है। वर्ष 2014 तक भाजपा और कांग्रेस में मत प्रतिशत का अंतर सात प्रतिशत से अधिक नहीं रहा, जबकि अन्य दलों और निर्दलियों की कुल मतदान में सात प्रतिशत के करीब हिस्सेदारी रही।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी लहर में रिकार्ड 55.9 प्रतिशत मत हासिल किये, जबकि कांग्रेस को 34.4 प्रतिशत मिले। वहीं अन्य दल और निर्दलियों ने 9.3 प्रतिशत मत हासिल किये। वर्ष 2014 से पहले ऐसे कई बार हुआ जब मामूली अंतर से लोकसभा चुनाव में जीत हार तय हुई।

2012 के लोकसभा उपचुनाव में भाजपा केवल 22 हजार मतों से जीती। इस चुनाव में उक्रांद और रक्षा मोर्चा के प्रत्याशी ने 15 हजार मत हासिल किये, जबकि निर्दलीय 22 हजार मत ले गए। वर्ष 2009 में अल्मोड़ा में भाजपा कांग्रेस के बीच जीत हार का अंतर सबसे कम रहा है।

यहां कांग्रेस के प्रदीप टम्टा लगभग 7 हजार मतों से चुनाव जीते, जबकि उक्रांद के प्रत्याशी रंजीत विश्वकर्मा ने लगभग 11 हजार मत हासिल किये। पौड़ी लोकसभा क्षेत्र में 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल महाराज मात्र 23 हजार मतों से भाजपा प्रत्याशी टीपीएस रावत से जीते। यहां पर वाम दलों ने 13 हजार मत हासिल किये जबकि उक्रांद 6 हजार और तीन निर्दलियों ने 13 हजार मत हासिल किये। 

मैदानों में सपा बसपा की है उपस्थिति 
दो मैदानी लोकसभा क्षेत्रों हरिद्वार और नैनीताल में सपा बसपा की उपस्थिति हमेशा रही है। सपा वर्ष 2004 में हरिद्वार सीट जीत भी चुकी है। इसके बाद हुए चुनावों में सपा और बसपा का दोनों मैदानी सीटों पर 15 से 18 प्रतिशत तक वोट शेयर रहा है। वर्ष 2014 में बसपा ने हरिद्वार में एक लाख से अधिक मत हासिल किये थे। 

अन्य दलों की स्थिति
पार्टी         2014        2009         2004
भाजपा       55.9       33.80         40.98
कांग्रेस        34.4      43.14         38.31
अन्य दल      9.2          6.6           6.9
और निर्दलीय  

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