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Lok Sabha Election: बिना अनुमति लगाई पुलिस तो निरस्त हुआ था 1981 में चुनाव, जानें गढ़वाल सीट का रोचक इतिहास

Mon, 08 Apr 2024 01:35 PM IST
रेनू सकलानी नीरज मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
नीरज मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 08 Apr 2024 01:35 PM IST
सार

गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में 1981 में हुए लोकसभा चुनाव में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट फ्रंट के हेमवती नंदन बहुगुणा ने 56 बूथों पर कब्जा कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। 

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Lok Sabha Election Uttarakhand Garhwal seat History Election were canceled in 1981 without police permission
गढ़वाल सीट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में 43 वर्ष पूर्व 1981 में हुआ लोकसभा चुनाव काफी रोचक हुआ था। उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना चुनाव आयोग की अनुमति के गढ़वाल सीट पर हरियाणा समेत अन्य राज्यों की पुलिस बल को तैनात कर दिया था। इसकी शिकायत होने पर आयोग ने जून 1981 में चुनाव निरस्त कर तीन माह में दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था।

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दरअसल, तब गढ़वाल सीट पर डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट फ्रंट से हेमवती नंदन बहुगुणा और कांग्रेस (आई) से चंद्रमोहन सिंह नेगी चुनाव लड़ रहे थे। बहुगुणा ने इस चुनाव में कांग्रेस (आई) द्वारा चुनाव आचार संहिता के बड़े पैमाने पर उल्लंघन का आरोप लगाया था।
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उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री ने नेगी के लिए प्रचार करके सभी परंपराओं को तोड़ दिया है। यही नहीं तब कांग्रेस प्रत्याशी के लिए पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी प्रचार किया था। बहुगुणा ने मुख्य चुनाव आयुक्त एसएल शंखधर ने भेंट कर 56 मतदान केंद्रों पर कब्जा कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था।

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चुनाव न केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए दिखाई भी देने चाहिए
शिकायत के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त एसएल शंखधर ने पत्रकारवार्ता करके कहा था- आयोग द्वारा की गई जांच से पता चलता है कि मतदान केंद्रों पर कब्जे की कुछ घटनाएं हुई हैं। हालांकि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन चुनाव के समय प्रयुक्त किया लाने वाला पुलिस बल बिना आयोग की अनुमति के नहीं लगाया जा सकता है। चुनाव न केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए बल्कि दिखाई भी देने चाहिए।  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पड़ोसी राज्यों से विशाल पुलिस बल लगाने से वातावरण खराब हुआ है।

कठिन थी समय सीमा
गढ़वाल में पुनर्मतदान में चुनाव आयुक्त द्वारा 30 सितंबर तक समय सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन सरकार के लिए यह कठिन था। सरकार का कहना था कि 14 जून को हुई झड़प के बाद क्षेत्र में अभी भी तनाव है और मानसून करीब है। इसलिए चुनाव अक्टूबर तक के लिए टाले जा सकते हैं। राज्य सरकार और गृह मंत्रालय दोनों 30 सितंबर से पहले पुनर्मतदान पूरा करने में अनिच्छुक थे।

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