उत्तराखंड की सभी सीटों पर खिला कमल, कांग्रेस साफ
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उत्तराखंड की सभी पांच सीटों पर कमल खिला है। नरेंद्र मोदी की लहर के सहारे पांचों संसदीय सीटों पर भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने यहां चार सीटें कांग्रेस से छीनी हैं और एक सीट बरकरार रखी।
राज्य में सबसे बड़ी जीत नैनीताल-ऊधमसिंहनगर से पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने दर्ज की है। इन्होंने कांग्रेस के केसी सिंह बाबा को 284717 मतों से हराकर उनसे यह सीट छीन ली। कोश्यारी को कुल 636769 मत मिले।
शुक्रवार सुबह जैसे ही मतगणना शुरू हुई, ईवीएम से भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में धड़ाधड़ वोट निकले। नैनीताल में भाजपा के कोश्यारी ने शुरुआती कुछ घंटों में ही एक लाख से अधिक की बढ़त बना ली थी।
हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों ने कांग्रेस को धोया
उत्तराखंड में हरिद्वार सबसे हॉट सीट मानी जा रही थी। अपनी इस सीट से मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्नी रेणुका रावत को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाया। मुकाबला भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से था।
प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में हरीश रावत मात खा गए। निशंक ने रेणुका रावत को 177822 मतों से पराजित कर दिया। कांग्रेस कम से कम यहां जीत तय मानकर चल रही थी। यहां कांग्रेस ने मेहनत भी सबसे ज्यादा की।
पौड़ी में भाजपा नेता पूर्व मुख्यमंत्री जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी ने राज्य के कैबिनेट मंत्री कांग्रेस उम्मीदवार हरक सिंह रावत को 184526 मतों से हराया है।
पांचवीं बार संसद में पहुंचे खंडूड़ी
पौड़ी के सांसद रहे सतपाल महाराज चुनावी सरगर्मी के बीच ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। बाद में कांग्रेस के लिए उम्मीदवार तय करना मुश्किल हो गया। आखिरी समय में उम्मीदवार बनाए गए हरक सिंह रावत खंडूड़ी के मुकाबले में कहीं ठहर नहीं सके।
कोटद्वार से 2012 का विधानसभा चुनाव हार गए जनरल खंडूड़ी के लिए यह जीत काफी महत्वपूर्ण है।
वैसे, भाजपा के पांचों नवनिर्वाचित सांसदों में खंडूड़ी ही हैं, जो पांचवीं बार लोकसभा पहुंच रहे हैं। खंडूड़ी उत्तराखंड से केंद्र में मंत्री पद के प्रबल दावेदार भी हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नहीं बचा सके सीट
18 महीने पहले उपचुनाव जीतकर टिहरी राजघराने की माला राज्यलक्ष्मी ने भाजपा को यह सीट दिलाई थी। तब उन्होंने लगभग 22 हजार वोटों से साकेत को ही हराया था। साकेत दूसरी बार प्रयास करके भी अपने पिता की सियासी विरासत को नहीं बचा सके।
अल्मोड़ा सुरक्षित संसदीय क्षेत्र में विधायक के हाथों सांसद ने मात खाई। यहां भाजपा के अजय टम्टा ने कांग्रेस के प्रदीप टम्टा को 95690 मतों से हराया। 2009 के चुनाव में प्रदीप ने अजय को लगभग साढ़े छह हजार वोटों से हराया था।
मोदी ने मांगे थे पांच कमल
मोदी ने अपनी जनसभाओं में उत्तराखंड से पांच कमल मांगे थे, जो यहां की जनता ने बिना किसी हिचक के दे दिए। 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उत्तराखंड की पांचों सीटें जीती थीं।
2012 के उपचुनाव में कांग्रेस ने टिहरी सीट भाजपा के हाथों गंवा दी थी। पिछली बार की तरह इस बार भी यहां मुकाबला पूरी तरह भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा। इस मुकाबले में कांग्रेस बुरी तरह मात खा गई। हाथ पूरी तरह साफ हो गया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए यह काफी बड़ा झटका है। संभलने की उम्मीद में कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन मोदी लहर के आगे हरीश रावत की कतई नहीं चली। माना जा रहा है कि अब हरीश रावत के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
कांग्रेस को 34% मत पर एक भी सीट नहीं
शुरूआती रुझानों से ही पता चल गया था कि भाजपा इस बार उत्तराखंड की पांच सीटों को अपने खाते में डालने की ओर बढ़ रही है।
पौड़ी व नैनीताल सीट पर जीतने के साथ हरिद्वार, टिहरी और अल्मोड़ा में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ता रहा।
शाम तक कुल मतों में भाजपा 55.3 प्रतिशत वोट लेकर आगे रही। कांग्रेस को 34.00 प्रतिशत मत ही हासिल हो पाए। कांग्रेस न केवल हारी बल्कि उसके सभी प्रत्याशी भाजपा से भारी अंतर से हारे।
बसपा का वोट शेयर मात्र 4.7 प्रतिशत
उत्तराखंड में अपना मजबूत जनाधार रखने वाली बसपा का प्रदर्शन भी बेहद खराब रहा। बसपा तीसरी बड़ी पार्टी तो बनी रही पर उसके मत प्रतिशत काफी कम रहा।
बसपा का वोट शेयर मात्र 4.7 प्रतिशत ही है। वहीं आप का वोट प्रतिशत एक प्रतिशत से ऊपर रहा।
मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को पसंद न आने वाले नोटा का भी उपयोग किया है। वोट प्रतिशत के मामले में नोटा छठे नंबर की पार्टी रही। इसका मत प्रतिशत भी एक प्रतिशत से आगे है।
उत्तराखंड में आप साफ
उत्तराखंड की पांचों सीटों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार काफी पीछे चल रहे हैं।
तीन से चार चरणों की मतगणना के बाद आप के उम्मीदवार दो से तीन हजार वोट ही पा सके थे।
टिहरी संसदीय सीट से आप उम्मीदवार अनूप नौटियाल अपनी हार मानकर मतगणना को बीच में ही छोड़ कर चले गए।