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भाजपा की गाड़ी का पटरी से उतरने का खतरा!
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 04 Apr 2014 02:32 PM IST
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उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी में नाराजगी के बाद वाला अजीब दौर शुरू हो गया है।
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अपना क्षेत्र छोड़कर जा रहे नेता
किन्हीं कारणों से नाराज नेता या तो अपना क्षेत्र छोड़ कर दूसरे इलाके में पार्टी प्रचार कर रहे हैं या फिर प्रत्याशी की पसंद पर उन्हें तड़ीपार किया जा रहा है। इससे बगैर सिग्नल के इलेक्शन ट्रैक पर दौड़ रही भाजपा की गाड़ी पटरी से उतरने का खतरा है।
नेताओं के क्षेत्रबदर होने वाली इस फेहरिस्त में आधा दर्जन नाम शामिल हैं। यह अजीब तरह का ट्रेंड है जब नेता अपने क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी का चुनाव प्रचार करने के बजाय दूसरे इलाके में जाकर पार्टी के लिए काम कर रहा है।
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इसके दो ही कारण है, या तो नेताजी नाराज है या पार्टी प्रत्याशी को इन नेताजी की शक्ल पसंद नहीं है। नंदप्रयाग से विधायक रहे महेंद्र भट्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता है।
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वैसे तो उनका क्षेत्र पौड़ी संसदीय सीट के अंतर्गत आता है लेकिन पार्टी ने एक बड़े नेता के इशारे पर उन्हें यमुनोत्री भेज दिया है। यमुनोत्री क्षेत्र टिहरी लोकसभा सीट का हिस्सा है।
दूसरे इलाके में चुनावी प्रचार में व्यस्त
मनोहरकांत ध्यानी प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही राज्यसभा सदस्य रह चुके है, पौड़ी से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकेहै, इस ऐरिया में उनका खासा प्रभाव है लेकिन वह हरिद्वार में चुनावी प्रचार में व्यस्त है।
पौड़ी से टिकट के दावेदार अनिल बलूनी पिछले एक सप्ताह से बनारस में कैंप कर रहे है। बलूनी को मोदी कैंप का नेता माना जाता है। वे पौड़ी से टिकट के दावेदार थे लेकिन नहीं मिलने पर बनारस चले गए।
पौड़ी सीट से दूसरे दावेदार रहे मोहन सिंह रावत गांववासी भी गायब है। टिकट की लड़ाई में आखिरी समय में निशंक का साथ देने वाले हरिद्वार से नरेश बंसल भी नेपथ्य में हैं।
नैनीताल से राजनीतिक के पुरोधा नारायणदत्त तिवारी को शिकस्त देने वाले बलराज पासी ने भी इलाका छोड़ दिया है। सूत्र बताते है कि वह निशंक के बुलावे पर हरिद्वार में काम कर रहे है।
ये तो वे नेता हैं जो अपने ही इलाकों से कूच कर गए, नाराज नेताओं की फेहरिस्त तो अलग ही है।