मोदी सरकार में उत्तराखंड के ये मंत्री होंगे प्रबल दावेदार
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केंद्र में अगर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनती है कि प्रबल दावेदार के रूप में भुवन चंद्र खंडूड़ी का नाम ही सामने आता है।
खंडूड़ी की छवि, वरिष्ठता और पुराना अनुभव उनके प्रोफाइल को मंत्रिमंडल के सबसे करीब ले जाता है।
अन्य चेहरों में रमेश पोखरियाल निशंक और माला राज्यलक्ष्मी शाह भी यहां के पांच सांसदों में अपनी अलग पहचान रखते हैं।
पूर्ण बहुमत मिला तो खंडूड़ी का मंत्री बनना तय
एक्जिट पोल के कुछ नतीजे उत्तराखंड में भाजपा को पांच तो कुछ चार सीटें तक दे रहे हैं।
नतीजों में अगर भाजपा को ही पूर्ण बहुमत मिलता है तो भी एनडीए के अन्य घटक दलों को कैबिनेट में जगह तय मानी जा रही है। ऐसे में उत्तराखंड के हिस्से बहुत हद तक एक ही मंत्री पद आने की संभावना है।
खंडूड़ी पार्टी में सबसे वरिष्ठ हैं साथ ही उनकी ईमानदार छवि उन्हें अन्य से अलग बनाती है।
जीतकर आने वाले नामों में सिर्फ खंडूड़ी ही एक मात्र नेता हैं जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल का अनुभव रहा है।
मोदी ने खंडूड़ी की खुलकर तारीफ की
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में खंडूड़ी भूतल परिवहन मंत्री थे। इस दौरान खंडूड़ी ने उत्तराखंड समेत पूरे देश में सड़कों और हाईवे का ऐसा जाल बिछाया था।
इससे भी खंडूड़ी पहचान बनी। भाजपा ने पिछला विधानसभा चुनाव खंडूड़ी जरूरी के नारे के साथ लड़ा था हालांकि खंडूड़ी खुद हार गए थे।
खंडूड़ी पार्टी की पहली पसंद हो सकते हैं लेकिन उन्हें शुरू से ही मोदी कैंप से अलग माना जाता है।
शुरूआती दौर में उनके कुछ बयानों को मोदी के विपरीत भी माना गया। हालांकि चुनाव से पहले देहरादून में हुई रैली में मोदी ने खंडूड़ी की खुलकर तारीफ की थी।
माला राज्यलक्ष्मी शाह भी पंक्ति में शामिल
मोदी अगर खंडूड़ी के अलावा किसी अन्य नाम पर विचार करते हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी दावेदारों में शामिल दिखते हैं।
हालांकि पार्टी के अंदर उनके नाम पर ऐतराज जताने वाले उनके मुख्यमंत्री पद से हटने के कारणों पर सवाल उठा सकते हैं।
माला राज्यलक्ष्मी शाह भी इस पंक्ति में शामिल हो सकती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 2009 में जब सभी सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था कि तो 2012 के उपचुनाव में रानी की वजह से भाजपा को संसद में उत्तराखंड का प्रतिनिधि मिला था।
रानी मूलरूप से नेपाल के राजघराने से ताल्लुक रखती हैं। रानी को मंत्रिमंडल में जगह देकर भाजपा पड़ोसी से रिश्तों की डोर और मजबूत कर सकती है।