मिशन 2019: उत्तराखंड में भाजपा रहेगी काबिज या कांग्रेस लगाएगी उसके दुर्ग में सेंध, दांव पर इनकी साख
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उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव की मतगणना के साथ ही आज पता चल जाएगा कि भाजपा पांचों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखेगी या कांग्रेस उसके दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब होगी। प्रदेश में चुनाव परिणाम जानने का बेताबी से इंतजार हो रहा है।
सियासी जानकारों के मुताबिक, लोस सीटों के चुनाव परिणाम प्रदेश की राजनीति पर अलग अलग असर डालेंगे। इस लिहाज से प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए ये चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। इस चुनाव से उनकी आगे की सियासी राह और भविष्य तय होगा।
चार सीटों पर भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर
लोकसभा की पांच सीटों पर हुए चुनाव में कुल 52 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, लेकिन चार सीटों पर भाजपा और कांग्रेस में ही सीधी टक्कर मानी जा रही है। टिहरी में भाजपा सांसद माला राज्यलक्ष्मी और कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बीच सीधा मुकाबला है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि पौड़ी में भाजपा के तीरथ सिंह रावत और कांग्रेस मनीष खंडूड़ी में से विजेता तय होना है तो नैनीताल ऊधमसिंह नगर सीट पर भाजपा के अजय भट्ट और कांग्रेस के हरीश रावत के बीच जीत-हार की जंग है।
अल्मोड़ा में भाजपा के अजय टम्टा और कांग्रेस के प्रदीप टम्टा में सीधा मुकाबला है। केवल हरिद्वार लोकसभा सीट पर ही त्रिकोणीय मुकाबला है। इस सीट पर भाजपा के डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक और कांग्रेस के अंबरीश कुमार अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि बसपा-सपा का गठबंधन प्रत्याशी अंतरिक्ष सैनी भी चौंकाने की बात कर रहे हैं।
बहुत अहम है ये जीत
भाजपा: पांचों सीटों पर कब्जा बनाए रखने का जबर्दस्त दबाव है। वह एक भी सीट गंवाने का जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है। उस पर पांचों सीटें जीतने का ही नहीं बल्कि विधानसभाओं में कम से कम से 2014 की बढ़त को बनाए रखने का भी भारी दबाव है। चुनावी नतीजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कामकाज का भी रिपोर्ट कार्ड लिखेंगे। नतीजे प्रतिकूल आए तो भाजपा में सुलग रहा अंतर्विरोध सतह पर आ जाएगा।
कांग्रेस: लगातार पराजय से नेपथ्य में चली गई कांग्रेस के लिए भी ये चुनाव बेहद अहम है। 2014 के लोस चुनाव में सफाये के बाद वह विधानसभा में 11 के अंकों पर सिमट गई थी। लोस चुनाव की जीत उसके ढीले पड़ चुके सांगठनिक नेटवर्क के लिए संजीवनी का काम कर सकती है।
सपा-बसपा और अन्य: चुनाव परिणाम कम से कम हरिद्वार सीट पर बसपा और सपा का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। इस सीट पर मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की अच्छी खासी तादाद के चलते दोनों दलों ने हाथ मिलाए हैं। यदि ये गठबंधन चौंकाता है तो आगामी विधानसभा चुनाव में वह एक नई चुनौती पेश करेगा। बाकी अन्य दलों की भूमिका अपने मत प्रतिशत घटने-बढ़ने से अधिक नहीं मानी जा रही है।
इनकी साख दांव पर
- लोस चुनाव के सबसे बुजुर्ग और अनुभवी प्रत्याशी हरीश रावत हैं। नैनीताल लोस सीट पर उनका कांग्रेस अध्यक्ष अजय भट्ट से मुकाबला है। चुनाव की जीत और हार उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगी।
- लोस चुनाव में जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलना तय है। लेकिन यदि नतीजे प्रतिकूल आए तो इसका ठीकरा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सिर फूटेगा। चुनावी नतीजे प्रदेश सरकार के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड लिखेंगे।
- पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक के लिए भी ये चुनाव बेहद अहम हैं। चुनाव जीतने के बाद उनकी केंद्रीय मंत्रिमंडल में दावेदारी बढ़ेगी।
- नैनीताल लोस सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट का राजनीतिक भविष्य भी जीत और हार से तय होगा। बीता विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब उनके पास संसद में जाने का ये सुनहरा अवसर है।