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उत्तराखंडः बंद प्रोजेक्ट में दौड़ेगा साझा करंट

Sat, 13 Sep 2014 09:44 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 13 Sep 2014 09:44 AM IST
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lohari nagpala power project will start

उत्तरकाशी के लोहारी नागपाला पॉवर प्रोजेक्ट को चालू किए जाने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार साझा रूप से तैयार हैं। पर्यावरणविद् जीडी. अग्रवाल के विरोध पर 2010 से एनटीपीसी का यह प्रोजेक्ट बंद है।

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चार साल से पचड़े में फंसे प्रोजेक्ट को एनटीपीसी हैंडओवर करना चाह रहा था। ऐसी दशा में राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया कि इसे राज्य सरकार को सौंप दें या फिर साझेदारी में इस योजना को आगे बढ़ाया जाए।
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दो अहम फैसले
शुक्रवार देर शाम दिल्ली में केंद्र सरकार के सचिव समन्वय एसके. अग्निहोत्री केसाथ हुई बैठक में प्रदेश के ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार और उत्तराखंड जल निगम एमडी जीपी.पटेल शामिल हुए।
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बैठक में साझा प्रोजेक्ट चलाने और देनदारियों केलिए आयोग के गठन पर दो अहम फैसले हुए हैं। प्रोजेक्ट से जुड़े कई ठेकेदार हैं जिनका भुगतान लंबित है।

राज्य सरकार ने केंद्र को स्पष्ट किया है कि पर्यावरण को लेकर इलाके में जो नुकसान होना था वह हो चुका है। इस योजना पर एनटीपीसी के एक हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं ऐसे में योजना को बंद करने में जितना खर्च आएगा उतने में इसे शुरू कर देश हित में बिजली उत्पादन हो सकेगा।

उत्तराखंड को ऊर्जा सम्पन्न बनाने की दृष्टि से इन दिनों ऊर्जा विभाग उन सभी परियोजनाओं पर काम कर रहा है जिसमें कोर्ट का हस्तक्षेप नहीं है।

पर्यावरण नुकसान के चलते बंद

लोहारी नागपाला पॉवर प्रोजेक्ट भी उन्हीं में शामिल है। उत्तरकाशी-गंगोत्री के बीच एनटीपीसी की ओर से बनने वाले 660 मेगावाट के इस पॉवर प्रोजेक्ट को 2010 में पर्यावरण नुकसान के चलते बंद कर दिया गया था।

पर्यावरणीय विरोध के चलते ही उत्तरकाशी से गंगोत्री तक के क्षेत्र को ईको सेंसटिव जोन घोषित कर दिया गया। जिसके चलते राज्य सरकार के भी दो भैरोघाटी और मनेरी हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट बंद हैं।


राज्य सरकार भी इन प्रोजेक्ट पर करीब तीन सौ करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। राज्य सरकार ने केंद्र से यह भी अनुरोध किया है कि ईको सेंसटिव जोन का दायरा कम किया जाए। पिछले दिनों केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के देहरादून आने पर मुख्यमंत्री ने ईको सेंसटिव जोन में ढिलाई की बात कही थी।

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