नौकरी के लिए दुबई गया था कमलेश, मौत के बाद अब छोटे भाई के कंधों पर आया परिवार के भरण-पोषण का बोझ
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गरीबी के कारण पढ़ाई-लिखाई की उम्र में सेमवाल गांव के कमलेश को नौकरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही कारण है कि 22 साल की आयु में वह सात समुंदर पार दुबई नौकरी के लिए चला गया। अब कमलेश की मौत के बाद बूढ़े मां-बाप का सहारा छिन जाने के कारण परिवार की जिम्मेदारी छोटे बेटे राजेश के कंधों पर आ गयी है।
धनोल्टी तहसील में सकलाना पट्टी के सेमवाल गांव निवासी कमलेश भट्ट आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर सका। उसने जैसे-तैसे गांव में इंटर की पढ़ाई भी मुश्किल से की और फिर काम की तलाश में जुट गया। दो साल पूर्व 22 साल की उम्र में कमलेश दुबई के एक होटल में नौकरी करने चले गया। इस पर बुजुर्ग पिता हरि प्रसाद भट्ट और माता प्रमिला देवी को आस थी कि उनका लाडला उनकी तंगहाली को दूर करेगा।
लेकिन 17 अप्रैल को कमलेश की मौत से परिजनों के सारे सपने चकनाचूर हो गए हैं। कमलेश की माता प्रमिला देवी भी पिछले लंबे समय से बीमार चल रही हैं। जिससे उनकी और परिवार की जिम्मेदारी इंटर की पढ़ाई पूरी कर चुके कमलेश के छोटे भाई राजेश के कंधों पर आ गयी है।
कमलेश का शव दोबारा पहुंचा आबूधाबी
दिल्ली एयरपोर्ट में कमलेश का शव न लिए जाने के कारण दोबारा आबुधाबी पहुंच गया है। आबुधाबी एयरपोर्ट पर समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने कमलेश के शव को रिसीव करने के बाद अस्पताल के मोर्चरी में रखवा दिया है। रोशन रतूड़ी ने लॉकडाउन की विषम चुनौतियों के बीच कड़े संघर्ष के बाद कमलेश के शव को दिल्ली भिजवाया था। लेकिन एयरपोर्ट से शव को वापस भेज दिया गया।
वहीं कमलेश के मामा मनीष उनियाल और चचेरा भाई विमलेश शव को दोबारा भारत लाने के लिए शनिवार को दिन भर पीएमओ, केंद्र सरकार और राज्य सरकार से संपर्क साधते रहे। उन्होंने कमलेश के शव को भारत लाकर शीघ्र ऋषिकेश स्थित पूर्णानंद घाट पहुंचाने की मांग की है। इस बावत एडीएम एससी द्विवेदी ने कहा कि परिजनों का प्रार्थनापत्र दिल्ली गृहमंत्रालय को भेजा गया है। सभी कार्रवाई वहीं से होनी है।