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Uttarakhand Lockdown: लॉकडाउन में बढ़ रही बेचैनी को न बनने देेें अवसाद, इन टिप्स को करें फॉलो

Thu, 16 Apr 2020 12:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 16 Apr 2020 12:49 PM IST
सार

  • यो जिंदगी संस्था ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर 9756068126
  • मेंटल हेल्थ केस के लिए संस्था ने शुरू की निशुल्क सेवा

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Lockdown in Uttarakhand Updates in hindi: Do not let depression grow in lockdown, follow these tips
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना संक्रमण के चलते देश में लॉकडाउन की इस अवधि में कई लोगों की नौकरियां गई हैं। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अनिश्चितकालीन छुट्टी पर भेज दिया है। ऐसे में घबराहट और डिप्रेशन की शिकायतों में तेजी से उछाल आया है। लोगों में डिप्रेशन, घबराहट और नींद न आने संबंधि तमाम तरह की समस्याएं अचानक बढ़ गई हैं।

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अधिकतर समस्याएं आर्थिक अनिश्चितता से जुडी हैं। मेंटल हेल्थ केस पर काम करने वाली संस्था ‘‘यो जिन्दगी’’ ऐसे लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए आगे आई है। संस्था ने हेल्पलाइन नंबर 9756068126 जारी किया है। इस नंबर पर कॉल के साथ व्हाट्स एप के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।
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‘‘यो जिन्दगी’’ के संस्थापक बंजारावाला, देहरादून निवासी बिमल रतूड़ी ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के बाद लगातार मेंटल हेल्थ केसेस में उछाल आया है। अचानक आए उछाल को देखते हुए यो जिन्दगी ने एक इंटर्नशिप मेंटल हेल्थ इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत दो तरह की सेवाएं निशुल्क दी जा रही हैं।

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पहला हेल्पलाइन नंबर, जिसमें प्रोफेशनल काउंसलर्स की टीम द्वारा केस को देखा जा रहा है। यह काउंसिलिंग सेवा हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। दूसरा फेसबुक, ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार इस विषय पर जागरूकता लाई जा रही है। हेल्पलाइन नंबर पर अभी तक 14 अप्रैल से 12 राज्यों से 200 से ज्यादा कॉल्स अटेंड की गई हैं।

‘‘यो जिन्दगी’’ से जुड़ी काउंसलर स्निग्धा नायर ने बताया कि डॉकडाउन के दौरान डिप्रेशन, घबराहट, मानसिक तनाव जैसी समस्याएं अचानक बढ़ गई हैं।  हर दिन तक़रीबन 20 से ज्यादा केस देखे जा रहे हैं। अधिकतर केस में डिप्रेशन और घबराहट की पहली स्टेज है पर इस के प्रभाव लॉकडाउन के दौरान और आगे भी जारी रहने का खतरा है।
 

अपने भीतर राष्ट्रीयता की भावना करें जागृत : डॉ. नंदकिशोर

निश्चित तौर पर लॉकडाउन के इस वातावरण में सामंजस्य बैठाना मुश्किल है, लेकिन यही प्रकृति का नियम भी है। जब भी सृष्टि में कुछ बदलाव होते हैं तो हमें ही उसके अनुरूप बदलना पड़ता है। यह कहना है जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. नंदकिशोर का। उनकी मानें तो अभी अनिश्चितता का दौर चल रहा है। हो सकता है, यह लंबा चले। जो लोग अपने घरों तक नहीं पहुंच पाए, वे परेशान हैं।

कुछ लोग बच्चों की पढ़ाई को लेकर उलझन में हैं। अवसाद, तनाव, अनिद्रा और असुरक्षा की भावना, ये सब मानसिक बीमारियों के लक्षण हैं। हम सब लोग इस व्यक्त एक विश्वव्यापी लड़ाई लड़ रहे हैं। तनाव और अवसाद से दूर रहना है तो अपने भीतर राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करें। जब हम राष्ट्र के बारे में सोचते हैं, तो खुद की नीजि परेशानियां हमें खुद-ब-खुद छोटी लगने लगती हैं।

आशावादी बनें, बुरा वक्त आसानी से कट जाएगा

मानसिक तनाव और डिप्रेशन, स्वस्थ और सेहतमंद जीवनशैली को बेहद प्रभावित करता है। इसका प्रभाव न केवल आपके मन व मस्तिष्क पर नकारात्मक रूप से पड़ता है, बल्कि यह आपको शारीरिक रूप से भी कमजोर कर देता है। डिप्रेशन से बचने के लिए उसे जानना और दूर करने का प्रयास करना बहुत जरूरी है।

1- सबसे पहले डिप्रेशन दूर करने के लिए आठ घंटे की नींद लें। नींद पूरी होगी तो दिमाग तरोताजा होगा और नकारात्मक भाव मन में कम आएंगे। 
2- प्रतिदिन सूरज की रोशनी में कुछ देर जरूर रहें।
3- व्यायाम अवसाद को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है। इससे न केवल एक अच्छी सेहत मिलती है, बल्कि शरीर में एक सकारात्मक उर्जा का संचार भी होता है। व्यायाम करने से शरीर में सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन हार्मोंस का स्त्राव होता है, जिससे दिमाग स्थिर होता है और अवसाद देने वाले बुरे विचार दूर रहते हैं।
4- कोई भी ऐसे लोगों के बीच में रहना पसंद नहीं करता जो कि लगातार दूसरों को नीचे गिराने में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों से दूर रहने से मन को शांति और विवेक प्रदान करने में आपको मदद मिलेगी।
5- दिनभर टीवी चैनलों पर चलने वाली न्यूज से दूर रहें। फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि सोशल साइट पर लगातार न बने रहें।
6- परिवार के साथ समय बिताएं, बच्चों को नए गेम्स सिखाएं, अपने वे शौक पूरा करें, जिन्हें आप हमेशा से करना चाहते थे, लेकिन समयाभाव के कारण पूरा नहीं कर पा रहे थे।
7- नेगेटिविटी से बचें, पॉजिटिव होने की कोशिश करें।
8- दूरदर्शन पर इन दिनों रामायण और महाभारत फिर से शुरू हो गई है। आप इन सीरियल को देखना शुरू करें। निश्चित तौर पर आपका अकेलापन दूर होगा। आप अपने भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार महसूस करेंगे।
9- सुबह और शाम के समय ध्यान-योग के लिए एक समय निश्चित कर लें। ऐसा करने से आपको शांति मिलेगी और मन में सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति होगी।
10- अंत में इस बात पर मंथन करें। इस पृथ्वी में कुछ भी स्थायी नहीं है। ये एक बुरा वक्त है, जो कुछ दिन बाद खत्म हो जाएगा। आशावादी बनें।

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