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Lockdown: हरिद्वार में गुर्जर बस्ती से हटी पाबंदी, शहर में शुक्रवार से दोपहर एक बजे तक किताबों की दुकानें भी खुलेंगी

Thu, 23 Apr 2020 07:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 23 Apr 2020 07:06 PM IST
सार

  • दुकानों से खरीदने के साथ होम डिलीवरी के लिए जारी होगा नंबर
  • नियमों का पालन कराएंगे शिक्षा विभाग के अधिकारी

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lockdown in uttarakhand: book Shops Will Open in haridwar 24TH april
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

लॉकडाउन में हरिद्वार जिला प्रशासन की तरफ से लगातार रियायत दी जा रही है। जिला प्रशासन ने अब किताबों की दुकानों को खुलने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार से जिले में सभी जगह किताबों की दुकानें खुल सकेंगी। होम डिलीवरी के लिए पुस्तक भंडारों के शीघ्र ही नंबर जारी कर दिए जाएंगे। सभी स्कूलों में एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र सुचारु शुरू होना था, लेकिन लॉकडाउन के चलते स्कूल बंद हैं। अधिकांश स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है।

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छात्रों के पास पुस्तकें और स्टेशनरी न होने पर बड़ी समस्या सामने आ रही थी। शासन के निर्देश पर बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी सी रविशंकर ने पाठ्य पुस्तकें बेचने वाली दुकानों को खोलने की अनुमति जारी कर दी है। पुस्तक भंडारों एवं दुकानों का खुलने का समय सुबह सात बजे से दोपहर एक बजे तक का नियत किया है। शुक्रवार की सुबह से दुकानें नियत समय पर खुलेंगी। व्यवस्था संभालने के लिए शिक्षा विभाग के खंड शिक्षा अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ब्रह्मपाल सैनी ने बताया कि आदेश की प्रति पुस्तक भंडार और स्कूल प्रबंधकों को जारी कर दी है। शीघ्र ही होम डिलीवरी के लिए पुस्तक भंडारों के नंबर जारी कर दिए जाएंगे।
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पर्याप्त है स्टेशनरी और पाठ्य क्रम
पुस्तक भंडार संचालकों ने फरवरी महीने में ही तैयारी कर दी थी। सरकारी पुस्तकें तो जनवरी महीने में ही छपकर आ चुकी थी। अधिकांश विक्रेताओं ने स्टेशनरी का भी पर्याप्त इंतजाम किया हुआ है। ज्वालापुर के भार्गव पुस्तक सदन के मालिक रजत भार्गव और जगजीतपुर में संजीव स्टेशनरी के संचालक राजीव भार्गव ने बताया कि किताबों और स्टेशनरी की कोई दिक्कतें नहीं रहेगी।

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गुर्जर बस्ती से हटाई पाबंदी

हरिद्वार जिला प्रशासन ने गैंडीखाता वन गुर्जर बस्ती से 20 दिन बाद पाबंदी हटा दी है। अब यहां के लोग लॉकडाउन के नियमों के तहत अपने जरूरी कामकाज कर सकेंगे। गांव के जिन लोगाें को होम क्वारंटीन किया गया है उनके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी जारी रहेगी। ऐसे लोगों के घर के बाहर आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मालूम हो कि एक अप्रैल को पुलिस को पता चला था कि गुर्जर बस्ती के कई लोग भी जमात में शामिल होकर लौटे हैं। पहले तो यह लोग इस बात को छुपाते रहे, लेकिन सख्ती करने पर 98 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। तीन अप्रैल को प्रशासन ने इन 98 लोगों को कलियर में क्वारंटीन कर दिया था और बस्ती पर पाबंदी लगा दी थी। इन 20 दिनों में बस्ती में आवाजाही पर रोक लगी थी। केवल आवश्यक सेवा वालों को ही जाने दिया था। यहां से क्वारंटीन किए गए सभी लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। स्वास्थ्य विभाग ने जांच करने के बाद अधिकांश को कलियर से लाकर बस्ती में ही होम क्वारंटीन कर दिया है। अब कलियर में रह रहे 18 लोगों को भी यहां लाने की तैयारी है।

सभी 98 लोगों का स्वास्थ्य सामान्य होने पर जिला प्रशासन ने बस्ती पर लगी पाबंदी हटाने का निर्णय लिया। एसडीएम कुश्म चौहान ने बताया कि शुक्रवार से लॉकडाउन के नियमों का पालन कराते हुए अन्य क्षेत्रों की भांति यहां भी दुकानें खुलने लगेंगी और आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन जारी रहेगा। क्षेत्र के किसान अपने कृषि उपकरणों की मरम्मत करा सकेंगे और गेहूं एवं गन्ने की फसल को क्रय केंद्रों पर ले जा सकेंगे।

सशर्त बिकेगा दूध

बस्ती के सभी सैकड़ों परिवार पशुपालन से जुडे़ हैं और प्रशासन ने इन लोगाें को दूध सशर्त बेचने की अनुमति दे दी है। एसडीएम कुश्म चौहान ने बताया कि अब सभी पशुपालक एक स्थान पर अपना दूध लाएंगे। इसी जगह से गाड़ियों से यह दूध भेजा जाएगा। कोई बाहरी दूधिये सीधे बस्ती में दूध लेने नहीं जा सकेगा। कोई भी बस्ती का पशुपालक दूध लेकर सीधे बाजार बेचने नहीं जा सकेगा।

पशुपालकों को उठाना पड़ा नुकसान
पूर्व प्रधान शमशेर भड़ाना, रोशन दीन, मोहम्मद आलम कसाना, सफी लोधा, बाबू खटाना, नूर भड़ाना, शमशेर कसाना आदि का कहना है कि लोगों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। हजारों लीटर दूध बर्बाद हो गया। पशुओं को देखभाल भी सही ढंग से नहीं कर पाए। इन लोगों ने पाबंदी के दौरान मदद करने वाले अधिकारियों की सराहना की।

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