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सीईओ ने अनिवार्य सेवानिवृति को मांगी कार्मिकों की सूची
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देहरादून। 50 वर्ष से अधिक आयु के अक्षम कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के मामले में शिक्षा विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आशारानी पैन्यूली ने सभी बीईओ को पत्र भेजकर ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची मांगी है।
खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला, रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी और चकराता को भेजे पत्र में उन्होंने राज्य सरकार के निर्देशों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि शासन के पत्र के अनुसार राज्य अधीन संवर्गों के तहत 50 वर्ष की आयु प्राप्त सरकारी कर्मचारी को नियुक्ति प्राधिकारी बिना कारण बताए तीन माह का नोटिस अथवा तीन माह का वेतन देकर अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर सकता है। उन्होंने इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे सभी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मियों, जिनकी आयु 50 वर्ष पूरी हो चुकी है की सूची मांगी है।
उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे कार्मिकों को शामिल किया जाए, जो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पात्र हैं। जो शासकीय कार्य करने में असमर्थ अथवा बीमार हैं, विद्यालय या कार्यालय से ज्यादातर अनुपस्थित रहते हैं, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करते हैं, राजकीय कार्यों के संपादन में विघ्न उत्पन्न करते हैं, जिनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है या किसी जांच में दोषी पाए गए हैं। उन्होंने ऐसे कार्मिकों की सूची कार्य दक्षता और सत्यनिष्ठा की गोपनीय रिपोर्ट समेत नियुक्ति अधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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खंड शिक्षा अधिकारी डोईवाला, रायपुर, सहसपुर, विकासनगर, कालसी और चकराता को भेजे पत्र में उन्होंने राज्य सरकार के निर्देशों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि शासन के पत्र के अनुसार राज्य अधीन संवर्गों के तहत 50 वर्ष की आयु प्राप्त सरकारी कर्मचारी को नियुक्ति प्राधिकारी बिना कारण बताए तीन माह का नोटिस अथवा तीन माह का वेतन देकर अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर सकता है। उन्होंने इसके लिए स्क्रीनिंग कमेटी के गठन के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे सभी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मियों, जिनकी आयु 50 वर्ष पूरी हो चुकी है की सूची मांगी है।
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उन्होंने कहा कि इसमें ऐसे कार्मिकों को शामिल किया जाए, जो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए पात्र हैं। जो शासकीय कार्य करने में असमर्थ अथवा बीमार हैं, विद्यालय या कार्यालय से ज्यादातर अनुपस्थित रहते हैं, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करते हैं, राजकीय कार्यों के संपादन में विघ्न उत्पन्न करते हैं, जिनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है या किसी जांच में दोषी पाए गए हैं। उन्होंने ऐसे कार्मिकों की सूची कार्य दक्षता और सत्यनिष्ठा की गोपनीय रिपोर्ट समेत नियुक्ति अधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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