पहल: उत्तराखंड में पहली बार शुरू हुई हेलीपैड का स्थायी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया
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उत्तराखंड में केदारनाथ, बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब यात्रा समेत आपदा प्रबंधन के लिए 52 हेलीपैड बने हैं। लेकिन अभी तक एक भी हेलीपैड को डीजीसीए से स्थायी लाइसेंस नहीं मिला है। इन हेलीपैड से अस्थायी लाइसेंस के जरिये हेली सेवाओं का संचालन किया जा रहा है।
उड़ान योजना के तहत पहली बार प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग की ओर से 13 हेलीपैड से हेली सेवा के संचालन के लिए स्थायी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें पवन हंस कंपनी ने 10 हेलीपैड की डीपीआर सरकार को सौंपी है।
अब केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की उड़ान योजना के तहत प्रदेश में हेली सेवाओं का संचालन किया जाएगा। इसके लिए स्थायी लाइसेंस लेना जरूरी होगा। प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग ने प्रदेश के 13 हेलीपैड का लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जहां पर यात्री सुविधाओं, सुरक्षा के मानकों को पूरा करना होगा। इसके बाद ही डीजीसीए स्थायी लाइसेंस जारी करेगी।
केदारनाथ हेली सेवा के लिए अस्थायी लाइसेंस
चारधाम यात्रा में सबसे ज्यादा केदारनाथ धाम के लिए वर्तमान में नौ हेली सेवाएं संचालित हो रही हैं। इसके लिए डीजीसीए से अस्थायी लाइसेंस लिया जाता है। प्रदेश के किसी भी हेलीपैड से नियमित हेली सेवाएं संचालित नहीं हो रही हैं।
जिस कारण हेलीपैड का लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं समझी गई। क्योंकि लाइसेंस लेने में खर्चा काफी है। स्थायी लाइसेंस के लिए हेलीपैड पर यात्रियों के ठहरने, शौचालय, पेयजल व अन्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है।
स्थायी लाइसेंस उन्हीं हेलीपैड के लिए जरूरी होता है, जहां से समय सारिणी के अनुसार हवाई सेवाओं का संचालन किया जाता है। प्रदेश में किसी भी हेलीपैड से नियमित हेली सेवाएं नहीं चल रही हैं। उड़ान योजना के तहत प्रदेश में हेली सेवाएं शुरू होनी हैं। इसके लिए 13 हेलीपैड का लाइसेंस लेने की प्रक्रिया चल रही है।
-दिलीप जावलकर, सचिव, महानिदेशक नागरिक उड्डयन विभाग