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Dehradun: निर्दयी समाज...पालने के बावजूद झाड़ियों में छोड़ रहे नवजात, 17 बच्चों को विदेश में मिली मां की गोद

Fri, 28 Apr 2023 01:45 PM IST
रेनू सकलानी वान्या दीक्षित, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
वान्या दीक्षित, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 28 Apr 2023 01:45 PM IST
सार

पिछले 10 सालों में मात्र एक बच्चा केदारपुरम स्थित शिशु सदन के बाहर लगे पालने में आया है। जबकि, 2016 से 2023 तक 73 बच्चे झाड़ियों, सड़क किनारे या अस्पताल के बाथरूमों में मिल चुके हैं। इनमें कुछ बच्चे अविवाहित लड़कियों के हैं। जिनके परिजनों ने इन बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया था।

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Leaving newborns in bushes abandoning cases children are continuously coming to fore in Dehradun Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झाड़ियों में एक बच्चा मिला है, एक मां अस्पताल के बाथरूम में नवजात को छोड़ कर चली गई। आए दिन शहर में इस तरह के मामले सुनने को मिलते रहते हैं। यदि कोई बच्चा पालने में असमर्थ है तो वह केदारपुरम स्थित शिशु सदन के बाहर लगे पालने में बच्चे को रखकर जा सकते हैं। हालांकि, लोग इतने निर्दयी हो गए हैं कि वह इतनी जहमत भी उठाने को तैयार नहीं हैं।

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बाल आयोग का कहना है कि कोई भी नवजात बच्चों को सड़क पर या झाड़ियों में न छोड़े। ऐसे बच्चों के लिए केदारपुरम में व्यवस्था की गई है। ऐसे परिजनों की पहचान गुप्त रखी जाती है। हालांकि, इसके बावजूद पिछले 10 सालों में मात्र एक बच्चा केदारपुरम स्थित शिशु सदन के बाहर लगे पालने में आया है।

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लोग गैर जिम्मेदार हो गए हैं
जबकि, 2016 से 2023 तक 73 बच्चे झाड़ियों, सड़क किनारे या अस्पताल के बाथरूमों में मिल चुके हैं। इनमें कुछ बच्चे अविवाहित लड़कियों के हैं। जिनके परिजनों ने इन बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया था। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना का कहना है कि लोग गैर जिम्मेदार हो गए हैं।
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यही कारण है कि मासूमों को इस तरह छोड़ दिया जाता है। वहीं, अगर भ्रूण की बात करें तो भ्रूण दो स्थिति में मिलता है। एक तो बेटे की चाहत में बेटी होने पर भ्रूण गिरा देते हैं। दूसरा, जब कोई अविवाहित लड़की गर्भवती हो जाती है तो अप्रशिक्षित डॉक्टर, अप्रशिक्षित दाई की मदद से भ्रूण गिरा दिया जाता है।

दून अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही

मार्च और अप्रैल में 12 दिन के अंतराल पर दो भ्रूण दून अस्पताल के नजदीक पड़े मिले थे। एक भ्रूण पर अस्पताल का टैग भी लगा था। इस मामले में अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। अगर किसी ने गर्भपात करवाया है तो वह भ्रूण को लेकर बाहर कैसे आ सकता है।

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17 बच्चों को विदेश में मिली मां की गोद 

आंकड़ों के मुताबिक 2016 से 2023 तक देहरादून में मिले 73 बच्चों को सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (कारा) के तहत भारत और विदेश में मां की गोद दिलवाई गई। इनमें 17 बच्चे विदेश गए और 56 बच्चे भारत में ही गोद दिए गए हैं।

पिछले तीन महीने में मिले नवजात और भ्रूण

-26 फरवरी : मसूरी में सड़क किनारे कंबल में लिपटी मिली थी बच्ची।

-22 मार्च : विकासनगर के उप जिला अस्पताल के बाथरूम में एक मां बच्ची को जन्म देकर फरार हो गई थी।

-22 मार्च : दून अस्पताल के पास झाड़ियों में एक विकसित भ्रूण मिला था। इस पर अस्पताल का टैग लगा था। यह भ्रूण लड़की का था।

-3 अप्रैल : दून अस्पताल के बाहर झाड़ियों में एक अविकसित भ्रूण मिला था।

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