{"_id":"4257964e48ad7a3dab9f19e497c95637","slug":"leader-crisis-in-aap-in-uttarakhand","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड में निकल गई 'आप' के दावों की हवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड में निकल गई 'आप' के दावों की हवा
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 21 Jan 2014 11:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आम आदमी पार्टी (आप) अभी तक उत्तराखंड में अपना नेता भी तय नहीं कर पाई है लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए ‘खास’ की तलाश शुरू कर दी है।
विज्ञापन
इस ‘खास’ को केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी छांट कर निकालेगी। 180 उम्मीदवार सामने आने के बाद आप ने उत्तराखंड की लोकसभा सीटों के लिए आवेदन लेना बंद कर दिया है।
दिल्ली सिस्टम यहां फेल
दिल्ली फतह के लिए आप ने अपने प्रत्याशी के लिए जो खांचा बनाया था वह उत्तराखंड के लिए फिट नहीं बैठ रहा है। उत्तराखंडी खांचा अभी तक तैयार नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
प्रदेश का नेता तय न होने से छोटे-छोटे क्षेत्रीय दल सीधे दिल्ली जाकर नेताओं से बात कर रहे हैं। रक्षा मोर्चा ने दिल्ली जाकर प्रेसवार्ता में आप से जुड़ने की घोषणा भी कर दी और प्रदेशवालों को पता ही नहीं चला। इसी तरह और भी कई छोटे दल आप के साथ गठजोड़ करने के चक्कर में हैं।
विज्ञापन
प्रत्याशी चुनने में मुश्किल
आप को 180 उम्मीदवारों में पांच प्रत्याशी छांटने में मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रदेश सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि सारे आवेदन सेंट्रल स्क्रीनिंग कमेटी के पास गए हैं।
इसके बाद उत्तराखंड पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी आवेदन पर विचार करेगी, तब पार्टी प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। नई रणनीति के तहत आप ने उत्तराखंड के विकास के मुद्दे को भी हवा देनी शुरु कर दी है।
कॉरपोरेट घरानों से लेंगे सहयोग
प्रदेश सहसंयोजक आशा रानी कपूर का कहना है कि प्रदेश के विकास के लिए कॉरपोरेट घरानों से भी सहयोग लिया जाएगा। आप के नेता वैसे प्रदेश में एक लाख से अधिक पार्टी मेंबर बनाने का दावा कर रहे हैं।
हालांकि, पार्टी से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि एसएमएस और आनलाइन सदस्य ऐसे पर्वतीय क्षेत्रों में पार्टी की जड़ें कहां तक जमा पाएंगे, जहां अब भी लोगों को घर-गांव तक पहुंचने में मीलों चलना पड़ता है।