भारत- नेपाल सीमा पर फर्जी आधार के साथ पकड़े गए तीन लोग, मुकदमा दर्ज
नेपाल से जुड़ी उत्तराखंड सीमा पर फर्जी आधार कार्ड दिखाने के मामले में पुलिस ने ग्लोबल एक्सपोर्ट कंपनी के एमडी समेत तीन पर आधार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
फर्जी आधार कार्ड दिखाकर सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के मामले में जिले में यह पहला मुकदमा दायर हुआ है। मामले की जांच चल रही है। ग्लोबल एक्सपोर्ट कंपनी के एमडी अशरफ हुसैन निवासी रुड़की 11 नवंबर को अपने मातहत मो. अकरम, मोहित कश्यप, सहारनपुर निवासी एक महिला कर्मी के साथ बनबसा से नेपाल जा रहे थे।
उनके पास विज्ञान लैब से संबंधित मानव अस्थिपंजर (डमी) समेत कई उपकरण आदि थे। उन्होंने ऑनलाइन कस्टम क्लीयरेंस कराया था, लेकिन उसके कागजात नहीं थे। एसएसबी की पूछताछ में उनकी साथी महिला के पास मिले आधार कार्ड और उसके बताए गए नाम, पते में अंतर था।
इस पर एसएसबी ने मानव तस्करी का अपराध समझा। एसएसबी की असिस्टेंट कमांडेंट तन्वी शुक्ला ने इन लोगों को बनबसा पुलिस को सौंप दिया। दो दिन चली जांच, पूछताछ के बाद फर्जी आधार कार्ड बनाने का मामला प्रकाश में आया।
थानाध्यक्ष मनीष खत्री ने बताया कि ग्लोबल एक्सपोर्ट कंपनी के एमडी ने अपनी महिला कर्मी का फोटो लेकर रुड़की स्थित स्मार्ट कैफे स्वामी तुषार को दिया, जिसने महिला का आधार कार्ड बना दिया। जांच में आधार कार्ड फर्जी होने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने उक्त कंपनी के एमडी अरशद हुसैन, रुड़की निवासी तुषार और युवती पर आधार अधिनियम 2016 की धारा 36/42, आईपीसी की धारा 419/468/471/120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सीओ राजन सिंह रौतेला ने बताया कि सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान होने के कारण आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया। आधार अधिनियम की जांच निरीक्षक स्तर से ही होनी है। इस नियम के तहत टनकपुर के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) उत्तम सिंह को सौंपी गई है। युवती को रीड्स संस्था के पुनर्वास केंद्र में रखा गया था, जिसे रविवार को यहां पहुंचे परिजनों को सौंप दिया गया।