फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Law is an honor, not a job: Biseshwar

जॉब नहीं एक सम्मान है विधि पेशा : बिसेश्वर

Wed, 06 Nov 2019 01:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 06 Nov 2019 01:21 AM IST
विज्ञापन
Law is an honor, not a job: Biseshwar
उत्तरांचल विवि में आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के विजेता-उपविजेता टीम के खिल?
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिसेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि वकालत व राजनीति में क्या नहीं करना है, ये जरूर सीखना चाहिए। वह मंगलवार को उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विधि पेशा जॉब नहीं बल्कि एक सम्मान है।
विज्ञापन

प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, पटना को विजेता घोषित किया जबकि जीएच रायसनी लॉ स्कूल, नागपुर को उपविजेता घोषित किया गया। इसके अलावा गर्वमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई की स्वरूपनी श्रीनाथ सर्वश्रेष्ठ महिला अधिवक्ता एवं बाहरा यूनिवर्सिटी शिमला हिल्स, हिमाचल प्रदेश के प्रणव कौशल को सर्वश्रेष्ठ पुरुष अधिवक्ता घोषित किया गया। सिमबाइसिस लॉ स्कूल हैदराबाद को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल एवं लॉ सेंटर-2, फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली यूनिवर्सिटी की एस शर्मा को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के खिताब से नवाजा गया। विजेताओं को 60 हजार का नगद पुरस्कार व शिल्ड दी गई।
विज्ञापन

इससे पहले न्यायमूर्ति बिसेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि हर सफल अधिवक्ता में एक अतिविशिष्ट गुण होता है। उसे पहचानना, ग्रहण करना एवं अपने आचरण में उतारना विधि के छात्र के लिए सफलता का गुरुमंत्र है। कहा कि एक वकील का कोर्ट में जरूरत से ज्यादा व अनावश्यक बोलना सबसे हानिकारक है। हर न्यायाधीश बिना बोले आपको सुनता है एवं आपके आचरण को देखता है। उन्होंने कहा कि विधि पेशा विशेषकर न्यायाधीश कोई नौकरी मात्र नहीं बल्कि एक सम्मान है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कार्यक्रम संयोजिका डॉ. पूनम रावत ने बताया कि प्रतियोगिता में देश के विभिन्न महाविद्यालयों की 80 टीमों ने हिस्सा लिया है। जबकि आयोजकों ने 32 टीमों को प्रारंभिक मुकाबले के लिए चुना। प्रतियोगिता में कॉलेज में 27 न्यायालयों का गठन किया गया। 57 निर्णायकों ने जज की भूमिका निभाई।

इस दौरान विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी, दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके शाली, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. रोमेश गौतम, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विवेक नारायण शर्मा एवं लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश बहुगुणा बतौर न्यायाधीश उपस्थित थे। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी, अंजुम परवेज, डॉ. अनिल दीक्षित, डॉ. एलएस रावत, डॉ. विजय श्रीवास्तव, उज्ज्वल कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed