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कब हो सकता है भूस्खलन, पता लगाना आसान
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 23 Oct 2015 03:51 PM IST
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महज पांच लाख रुपए में यह पता लग सकता है कि किसी भी क्षेत्र में भूस्खलन कब सक्रिय हो सकता है। भारतीय भूवैज्ञानिक संस्थान के वैज्ञानिकों ने यह तकनीक विकसित करने के बाद, नीलगिरी क्षेत्र में इसका सफल प्रयोग भी कर लिया है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि मात्र कुछ सटीक आंकड़ों और जानकारी के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि कितनी बरसात होने पर भूस्खलन सक्रिय हो सकता है। भूस्खलन उत्तराखंड के लिए भी एक बड़ी प्राकृतिक आपदा की तरह ही है। मुसीबत यह है कि इससे जुड़ी हुई कोई पूर्व चेतावनी का तंत्र नहीं है।
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ऐसे में भूस्खलन की चपेट में आकर हताहत होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा ही हो रहा है। बागेश्वर जिले में सुमगढ़ में अचानक हुए भूस्खलन के कारण 2010 में 18 छात्रों को काल का ग्रास बनना पड़ा था। इसी तरह कैलाश मानसरोवर यात्री दल के कई यात्रियों को भूस्खलन के कारण जान गंवानी पड़ी थी।
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वैज्ञानिक अब इस आपदा की पूर्व चेतावनी का तंत्र विकसित करने का दावा कर रहे हैं। एक कार्यशाला में भाग लेने दून पहुंचे भारतीय भूवैज्ञानिक संस्थान के डॉ. पंकज जायसवाल का कहना है कि कुछ सटीक आंकड़ों और अलार्म सिस्टम के जरिये यह संभव है। पूरे निगरानी तंत्र को स्थापित करने में महज पांच लाख रुपए तक का खर्च है।
डॉ. पंकज ने राज्य आपदा न्यूनिकरण और प्रबंधन केंद्र में भूस्खलन पर आयोजित कार्यशाला में इस तकनीक का खाका भी पेश किया। आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।
एक अधिकारी के मुताबिक प्रदेश में यह तकनीक कितनी कारगर होगी इसका परीक्षण होने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। प्रदेश में करीब 460 चिन्हित भूस्खलन क्षेत्र हैं और चार धाम यात्रा में भूस्खलन के कारण बार-बार व्यवधान का सामना सरकार को करना पड़ता है।
यह है तकनीक
पहला कदम : जिस क्षेत्र की निगरानी की जानी है उसका चयन
दूसरा कदम : बरसात मापन यंत्र स्थापित करना, भूस्खलन को ट्रिगर करने वाली सीमांत बरसात (थ्रेशोल्ड रेनफॉल) का आकलन
तीसरा कदम : जैसे ही बरसात इस स्थिति में पहुंचेगी कि भूस्खलन सक्रिय हो, अलार्म भी ट्रिगर हो जाएगा। थ्रेशोल्ड बरसात का आकलन करने के लिए क्षेत्र में बरसात के आंकड़ों की और पूर्व में हुए भूस्खलन की जरूरत होगी।
डॉ.पंकज के मुताबिक बीआरओ इस बात का पूरा रिकार्ड रखता है कि कब कहां से मलबा हटाया गया। इस रिकार्ड को बरसात के आंकड़ों के साथ मिलाने पर थ्रेशोल्ड लिमिट को निकाला जा सकता है।