नाबालिग को बंधक बनाकर उत्पीड़न करने वाली जज दीपाली शर्मा को झटका, हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उच्च न्यायालय ने हरिद्वार की निलंबित सिविल जज दीपाली शर्मा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के मामले में सरकार को 20 मार्च तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
29 जनवरी को जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार ने एसएसपी हरिद्वार को नाबालिग की बरामदगी के निर्देश दिए थे। एसएसपी हरिद्वार की टीम ने नाबालिग को सिविल जज के सरकारी आवास से बरामद कराया था।
नाबालिग ने पूछताछ में खुद को पदमपुरी नैनीताल निवासी बताया था और महिला चिकित्सालय हरिद्वार में हुई जांच में नाबालिग के शरीर पर 20 से अधिक चोटों की पुष्टि हुई थी। इसके बाद नाबालिग को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया और मेडिकल रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपी गई।
आरोप था कि नाबालिग को सिविल जज ने बंधक बनाकर रखा और उसका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया। मामले में जिला जज ने सिडकुल हरिद्वार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद जिला जज की रिपोर्ट के आधार पर ही उच्च न्यायालय ने सिविल जज को निलंबित किया था। शिकायती पत्र के आधार पर मुख्य न्यायाधीश ने जिला जज हरिद्वार को जांच कराने के निर्देश दिए थे। गिरफ्तारी से बचने व प्राथमिकी निरस्त करने की मांग को लेकर सिविल जज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।