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RTI के प्रयोग में पिछड़ी 'आधी दुनिया'
डॉ. योगेश योगी/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 12 Oct 2013 10:26 AM IST
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हर काम में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली महिलाओं (आधी दुनिया) को सूचना के अधिकार से सरोकार नहीं है।
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यह हम नहीं राज्य सूचना आयोग के आंकडें कह रहे हैं। 12 अक्तूबर 2013 को सूचना का अधिकार मिले आठ साल हो गए।
महिलाओं की संख्या नाममात्र
इन आठ सालों में प्रदेश में सूचना मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन अफसोस यह है कि सूचना मांगने वालों में महिलाओं की संख्या नाममात्र की है। आधी आबादी सूचना के अधिकार का प्रयोग करने में काफी पीछे रह गई है।
राज्य सूचना आयोग के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं। एक अक्तूबर 2013 तक आयोग में करीब 12 हजार मामले दर्ज किए गए।
इनमें महिलाओं की संख्या करीब नौ फीसदी ही है। महिला-पुरुष समानता के नारों के बीच सूचना के अधिकार में यह आंकड़े चिंतित करने वाले हैं।
कभी सुस्त, कभी तेज हुआ निस्तारण
राज्य सूचना आयोग ने कई मामलों के निस्तारण में तेजी दिखाई तो कुछ मामले सालभर से ज्यादा समय तक खिंचे। आयोग ने 1150 अपीलों का निस्तारण एक महीने की अवधि के अंदर कर दिया। वहीं 1075 केस ऐसे भी रहे जो एक साल से ज्यादा समय तक चले।
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अपील में दून अव्वल, चंपावत पीछे
सूचना आयोग में अपील करने के मामले में देहरादून निवासी अव्वल हैं तो चंपावत सबसे पीछे है। आयोग में अकेले देहरादून जिले से 4334 अपील दायर की गई जबकि चंपावत जिले से महज 62 अपील दर्ज की गई।
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