डॉ. कलाम के इस सुझाव पर रिसर्च में जुटे उत्तराखंड के युवा
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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कुमाऊं विवि से नैनो तकनीक पर कार्य करने तथा इसे अध्ययन का मुख्य केंद्र बनाने का आह्वान किया था। विवि ने अब इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया है।
कल्पना कीजिए उस संसार की जहां कंप्यूटर का सीपीयू एक काजल की डिब्बी के बराबर हो और वर्तमान से सैकड़ों गुना ज्यादा क्षमता वाला हो, मकान की छत ही बिजलीघर के रूप में काम करे, दवा का असर खाने के साथ ही हो जाय और गंभीर रोग भी तत्काल ठीक हो जाए।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने 2011 में ऐसे चमत्कारिक कार्य संभव कर सकने वाली तकनीक नैनो पर कार्य करने तथा इसे अध्ययन का मुख्य केंद्र बनाने का आह्वान कुमाऊं विवि से किया था। विवि ने अब इस पर कार्य प्रारंभ कर दिया है तथा इसके बेहतरीन परिणाम आने की पूरी संभावना है।
कुमाऊं विश्वविद्यालय परिसर में डा. कलाम ने 10 अगस्त 2011 को विवि के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नैनो टेक्नोलॉजी की संभावनाओं पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए इस पर कार्य करने का सुझाव दिया था। उनके सुझाव पर अमल शुरू हो गया है।
राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने स्वीकृत की राशी
विवि ने विभाग व लैब के लिये स्थान तो निर्धारित कर लिया था लेकिन इसकी शुरुआत के लिये लगभग 50 लाख रुपए की राशि तथा अनुभवी फैकल्टी तथा वैज्ञानिकों की जरूरत थी। कुलपति प्रो. एचएस धामी ने बताया कि राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने इसके लिए 50 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की थी।
23 फरवरी 2015 को यहां नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोसेंटर की शुरुआत की गई। जिसमें एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एनजी साहू के निर्देशन में 12 विद्यार्थी नैनो साइंस पर शोध कर रहे हैं। प्रो. धामी ने दावा किया कि अगले छह माह में इस लैब में सस्ती दरों पर ग्राफिन के निर्माण की तकनीक उपलब्ध हो जाएगी।
प्रो. धामी के अनुसार ग्राफीन का निर्माण होने से सोलर एनर्जी, दूरसंचार, कंप्यूटर, मेडिकल आदि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे, जिनका लाभ विवि को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रोनिक्स में वर्तमान में प्रयुक्त होने वाली सिलिकॉन आधारित प्रणाली 15 वर्षों के भीतर पूरी तरह ग्राफिन आधारित हो जाएगी।
शोधार्थी विनय पुनेठा ने बताया कि सोलर सेल में इसके प्रयोग से छत की ऐसी पारदर्शी चादरें तैयार की जा सकेंगी जो दिन में रोशनी देने के साथ ही सोलर पैनल का भी काम करेंगी और भारी मात्रा में विद्युत उत्पादन करेंगी। प्रो. धामी के अनुसार कुमाऊं विवि में जल्द ही इसके सस्ते में तैयार करने की तकनीक विकसित हो जायेगी।
इसी के साथ जर्मिनेन मैटीरियल पर भी विवि में शोध जारी है इसके माध्यम से इलाज में दवाओं को शरीर के वांछित हिस्से में आसानी से और तीव्रता से पहुंचाया जा सकेगा जिससे तमाम गंभीर रोगों का इलाज आसान, सस्ता व त्वरित हो जायेगा।
क्या है ग्राफिन मैटीरियल
नैनो टैक्नोलाजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. साहू ने बताया कि 2007 में हंगरी के वैज्ञानिक आंद्रेजीन तथा एके नोबासोलो ने ग्राफिन मैटीरियल की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार भी मिला था।
यह मैटीरियल इतना मजबूत है कि फुलस्कैप कागज की मोटाई व आकार का इसका टुक ड़ा दस हजार हाथियों का वजन संभाल सकता है। इलेक्ट्रोनिक्स में इसके प्रयोग से सीपीयू का आकार एक हजार गुना छोटा आर क्षमता कई गुनी बढ़ जाएगी।