कोटद्वार: हाईवे पर बांस खाने धमक रहे हाथी, लोगों के लिए बना खतरा
- दस साल पहले लगाए थे बांस के पौधे, अब बना जंगल
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उत्तराखंड के कोटद्वार में लैंसडौन वन प्रभाग की ओर से हाईवे पर सड़क सुरक्षा के लिए रोपे गए बांस के पौधे अब लोगों के लिए खतरे का सबब बन गए हैं। हाथी कोरीडोर होने के कारण हाथी मनपसंद बांस की पत्तियों को खाने के लिए एनएच पर धमक रहे हैं, जिससे यहां आवाजाही में खतरा बना हुआ है।
लैंसडौन वन प्रभाग ने करीब 10 वर्ष पूर्व कोटद्वार-पौड़ी हाईवे के किनारे लालपुल से आमसौड़ के बीच तक दो किमी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के उद्देश्य से बांस का प्लांटेशन किया गया था। अब वर्तमान में हालत यह है कि वे बांस के पौधे अब जंगल में बदल चुके हैं।
भारी मात्रा में बांस की पत्तियां होने के कारण हाथी यातायात के बीच धमक रहे हैं, जिसके कारण सड़क जाम होना आम बात हो गई है। हाथी कई बार लोगों को दौड़ा भी चुका है, जिससे यहां आवाजाही में खतरा बना हुआ है।
राजाजी और नेशनल पार्क का है हाथी कोरिडोर
एनएच पर लालपुल से दुगड्डा की ओर दो किमी मार्ग पर राजाजी नेशनल पार्क, कार्बेट नेशनल पार्क और लैंसडौन वन प्रभाग का हाथी कोरिडोर है। इन स्थानों पर हाथी का मूवमेंट सबसे अधिक रहता है। मार्ग से सटे जंगल में उगे बांस के जंगल में राजाजी नेशनल पार्क और कार्बेट पार्क की ओर से आते-जाते समय हाथी यहां काफी देर तक रुकता है। यहां आठ से 10 हाथियों का झुंड प्रतिदिन लैंसडौन वन प्रभाग से पार्क क्षेत्र में मूवमेंट करता है।
एनएच के किनारे उगे बांस के पेड़ों को हटाने के लिए अधिकारियों को लिखा जाएगा। एनएच विभाग को भी हाथी के आवाजाही के लिए सुगम रास्ता बनाना चाहिए।
- जीसी बेलवाल, एसडीओ लैंसडौन वन प्रभाग।
रातभर सीतापुर रेलवे ट्रैक के पास घूमता रहा हाथी
हरिद्वार में सीतापुर रेलवे ट्रैक के आसपास रातभर रेडियो कॉलर किया गया एक हाथी घूमता रहा। गनीमत यह रही कि न तो हाथी को कोई नुकसान पहुंचा और न ही उसने किसी को हानि पहुंचाई, हालांकि खेतों में खड़े गन्ने को हाथी खाता रहा।
गंगा पार करके हाथियों के झुंड खेतों में पहुंचकर किसानों के गन्ने को खाने के लिए पहुंचते रहते हैं, जिससे किसान भी हाथियों से परेशान रहते हैं। रविवार की रात रेडियो कॉलर किए गए एक हाथी की लोकेशन जब सीतापुर रेलवे ट्रैक के आसपास पाई गई तो वन विभाग के हाथ पांव फूल गए। सूचना मिलने पर आधी रात में लगभग एक बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
हाथी की लोकेशन पर टीम नजर रखे रही, लेकिन हाथी किसानों के खेतों में घुसकर गन्ना खाता रहा। जिस क्षेत्र में वह विचरण कर रहा था उसी क्षेत्र में हाल ही में चार युवकों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है। वहीं, 2019 में दो नर हाथी भी ट्रेन की चपेट में आकर इसी ट्रैक पर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसको देखते हुए रातभर सर्दी के मौसम में भी वन विभाग के पसीने छूटे रहे, लेकिन अलसुबह चार बजे के बाद हाथी को बामुश्किल जंगल में वापस भेजा गया।
तब जाकर वन विभाग के अधिकारियों ने राहत महसूस की। हरिद्वार रेंजर दिनेश प्रसाद नौड़ियाल का कहना है कि हाथी अकेला था। इसलिए उसके उत्पात मचाने का खतरा बना हुआ था, लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया, उसे सुरक्षित वापस जंगल में खदेड़ दिया गया।