महरगांव आपदा: दो दिन पहले ही मायके आई थी रजनी, भूस्खलन से मकान हुआ जमींदोज, हमेशा के लिए खो दिया बेटा
हादसे के तुरंत बाद पास ही स्थित दूसरे मकान में मौजूद लोगों में चीख पुकार मची तो लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने मलबे में फंसी विदेश्वरी देवी को सुरक्षित निकाला।
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कोटद्वार के द्वारीखाल ब्लॉक के महरगांव में मंगलवार सुबह धीरेंद्र सिंह के घर पर चाय पीने के बाद नाश्ते की तैयारी चल रही थी। इसी बीच मकान के पीछे की पहाड़ी से मलबे के साथ आई मौत ने पूरा मकान जमींदोज कर दिया। मलबा इतनी तेजी से आया कि संभलने का मौका ही नहीं मिला।
मकान के भीतर मौजूद धीरेंद्र सिंह (48), उनकी 85 वर्षीय मां मथुरा देवी, भाभी विदेश्वरी देवी और भतीजी रजनी देवी का दो साल का बेटा रुद्रांश मलबे में दब गए। हादसे के तुरंत बाद पास ही स्थित दूसरे मकान में मौजूद लोगों में चीख पुकार मची तो लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने मलबे में फंसी विदेश्वरी देवी को सुरक्षित निकाला।
प्रधान अमित नेगी ने बताया कि धीरेंद्र सिंह के गांव में आसपास ही दो मकान हैं। दोनों में परिवार के लोग रहते हैं। धीरेंद्र सिंह की पत्नी विधाता देवी और उसका बेटा गौरव, भतीजी रजनी दूसरे मकान में होने से सुरक्षित हैं।
रजनी देवी की कुछ साल पहले सतपुली के पास बंदूण गांव में विवाह हुआ था। वह अपने दो साल के बेटे रुद्रांश को लेकर घी संक्रांति पर्व मनाने दो दिन पहले ही मायके महरगांव पहुंची थी। मंगलवार की आपदा ने रजनी से उसका बेटा छीन लिया। रजनी काे यह हादसा जीवनभर का गम दे गया।