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Dehradun News: उप जिला अस्पताल विकासनगर में मिलेगी घुटने और कूल्हा प्रत्यारोपण की सुविधा
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उप जिला अस्पताल में एक और हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो गई है। अब दो हड्डी रोग विशेषज्ञ हो गए हैं। अस्पताल को एक नई हाइड्रोलिक ओटी टेबल भी मिली है। संसाधन बढ़ने के साथ अब अस्पताल में मरीजों घुटने और कूल्हा प्रत्यारोपण की भी सुविधा मिलेगी। हालांकि, मरीजोंं को ऑपरेशन के लिए स्वयं इंप्लांट खरीदना होगा। आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क इंप्लांट मिलता है, लेकिन दाम अधिक होने के कारण अस्पताल को इंप्लांट की खरीद में दिक्कत आती है।
जौनसार बावर और पछवादून क्षेत्र के मरीजों को अब घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण के लिए देहरादून की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। अब उप जिला अस्पताल में ही यह सुविधा मिलेगी। पूर्व में वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गुप्ता ने दो प्रत्यारोपण सर्जरी की थी, लेकिन बाद में संसाधन की कमी, ओपीडी और ऑपरेशन में मरीजों की संख्या बढ़ने के चलते वह प्रत्यारोपण सर्जरी नहीं कर पा रहे थे। अब एक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद राणा मिल गए हैं। इससे ओपीडी और ऑपरेशन का दबाव काफी कम हुआ है। ओटी की पुरानी टेबल भी प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं थी, अब नई हाइड्रोलिक टेबल मिल गई है। डॉ. सौरभ गुप्ता ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना की तय दरों पर इंप्लांट की उपलब्धता में दिक्कत आती है। बताया कि अगर मरीज इंप्लांट उपलब्ध करवाता है तो उसकी प्रत्यारोपण सर्जरी कर दी जाएगी।
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घुटनों और कूल्हे के इंप्लांट का खर्च
घुटनों और कूल्हे के इंप्लांट के दाम 70 हजार से एक लाख रुपये के मध्य हैं। निजी अस्पतालों में सर्जरी का खर्च 1.5 से पांच लाख रुपये तक होता है। वहीं, सरकारी अस्पताल में रियायती दर पर सर्जरी की जाती है।
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वर्जन
आयुष्मान भारत योजना की निर्धारित दर पर इंप्लांट की उपलब्धता में समस्या आती है। अगर मरीज प्लांट खरीदने के लिए सक्षम है तो प्रत्यारोपण सर्जरी की सुविधा मिल सकती है। ऐसे मरीज जो इंप्लांट खरीदने में सक्षम नहीं है, वह आयुष्मान भारत के पैनल में शामिल अस्पतालों में सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पताल
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जौनसार बावर और पछवादून क्षेत्र के मरीजों को अब घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण के लिए देहरादून की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। अब उप जिला अस्पताल में ही यह सुविधा मिलेगी। पूर्व में वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गुप्ता ने दो प्रत्यारोपण सर्जरी की थी, लेकिन बाद में संसाधन की कमी, ओपीडी और ऑपरेशन में मरीजों की संख्या बढ़ने के चलते वह प्रत्यारोपण सर्जरी नहीं कर पा रहे थे। अब एक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद राणा मिल गए हैं। इससे ओपीडी और ऑपरेशन का दबाव काफी कम हुआ है। ओटी की पुरानी टेबल भी प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं थी, अब नई हाइड्रोलिक टेबल मिल गई है। डॉ. सौरभ गुप्ता ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना की तय दरों पर इंप्लांट की उपलब्धता में दिक्कत आती है। बताया कि अगर मरीज इंप्लांट उपलब्ध करवाता है तो उसकी प्रत्यारोपण सर्जरी कर दी जाएगी।
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घुटनों और कूल्हे के इंप्लांट का खर्च
घुटनों और कूल्हे के इंप्लांट के दाम 70 हजार से एक लाख रुपये के मध्य हैं। निजी अस्पतालों में सर्जरी का खर्च 1.5 से पांच लाख रुपये तक होता है। वहीं, सरकारी अस्पताल में रियायती दर पर सर्जरी की जाती है।
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आयुष्मान भारत योजना की निर्धारित दर पर इंप्लांट की उपलब्धता में समस्या आती है। अगर मरीज प्लांट खरीदने के लिए सक्षम है तो प्रत्यारोपण सर्जरी की सुविधा मिल सकती है। ऐसे मरीज जो इंप्लांट खरीदने में सक्षम नहीं है, वह आयुष्मान भारत के पैनल में शामिल अस्पतालों में सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
डॉ. विजय सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला अस्पताल