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Kisan Andolan in Uttarakhand: कहीं समर्थन तो कहीं उठे विरोध के सुर, जगह-जगह हुए धरना-प्रदर्शन

Mon, 14 Dec 2020 07:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 14 Dec 2020 07:52 PM IST
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kisan andolan in uttarakhand news:  Bhakiu Tikait will submit a memorandum to JM today
- फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार को सोहलपुर में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में किसानों ने तीनों कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान 8 किसान उपवास पर बैठे। 

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भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष पदम सिंह रोड़ ने कहा कि केंद्र सरकार जो तीन कृषि कानून लेकर आई है, उससे किसानों को नुकसान के अलावा कुछ हासिल होने वाला नहीं है। मोदी सरकार के कृषि कानून किसान को बर्बादी की तरफ ही लेकर जाएंगे।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों व कुछ भाजपा नेताओं का किसानों को खालिस्तानी, पाकिस्तानी और आतंकवादी बताना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि तीनों काले कानून रद्द होने तक आंदोलन जारी रहेगा। 

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किसानों के समर्थन में आप कार्यकर्ताओं ने रखा उपवास

कृषि बिलों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों के समर्थन में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को उपवास रखा। प्रदेश भर में अलग-अलग विधानसभाओं में आप कार्यकर्ता उपवास पर बैठे। पार्टी का कहना है कि देश के किसान पिछले 19 दिनों से कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार निरंकुश हो चुकी है।

आप पार्टी के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में उपवास रखा। देहरादून में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर की अगुवाई में कार्यकर्ता छह नंबर पुलिया के समीप उपवास पर बैठे। कलेर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसानों के लिए काला कानून लेकर आए हैं, जिसका पूरे देश में विरोध हो रहा है।

आप पार्टी इसका विरोध करती है।  उन्होंने कहा कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय वो जयचंद हैं जो अपने कुछ लोगों को किसान बनाकर दिल्ली केन्द्रीय कृषि मंत्री से मिलाने ले गए। कलेर ने कहा कि भाजपा झूठ की राजनीति कर रही है। केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार से आम जनता, कर्मचारी और व्यापारी वर्ग, हर कोई परेशान है। सरकार इनकी सुध नहीं ले रही है।

उन्होंने कहा कि पहले नोट बंदी हुई। इसके बाद जीएसटी को लेकर लोगों को परेशान किया गया और अब कृषि बिल के विरोध में गरीब किसानों को परेशान किया जा रहा है। आप प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने कहा कि आप पार्टी पूरी तरह से किसानों के समर्थन में है। पार्टी की ओर से डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया। इस मौके पर प्रवक्ता संजय भट्ट, पूर्व आईएएस सुबर्धन शाह, दीपक सैलवान, जितेंद्र पंत, राजेश शर्मा, देवेंद्र वर्मा, वसीम अंसारी, कुलदीप सहदेव, फहीम बेग, विपिन नेगी, रितेश, शैलेष तिवारी, श्रीचंद आर्य आदि मौजूद रहे।

कृषि कानून कृषि आय को देगा बढ़ावा : रोहिला

भाजपा के योजना आयोग के उपाध्यक्ष विनय रोहिला ने कहा कि किसानों के लिए बनाया गया कृषि कानून उनकी आय को बढ़ावा देगा। किसान अब बंधन मुक्त हो चुके हैं और कहीं पर भी अपना माल बेच सकते हैं। यह कानून किसानों की राह को आसान करेगा। 

सोमवार को रुड़की पहुंचे योजना आयोग के उपाध्यक्ष विनय रोहिला का विधायक प्रदीप बत्रा, मेयर गौरव गोयल समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान प्रेस वार्ता कर विनय रोहिला ने कहा कि कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली में किसान आंदोलन कर रहे हैं।

सरकार उनकी बात सुन रही है। कृषि कानून में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे किसानों को नुकसान होगा। कृषि कानून ने किसानों को बंधन मुक्त कर दिया है। किसान अब कहीं पर भी अपना माल उचित दाम पर बेच सकते हैं। कहा कि भाजपा किसानों को साथ लेकर जिले में 16 दिसंबर को रैली निकालेगी। इसमें सभी विधायक और पार्टी कार्यकर्ता शामिल होंगे। 

कृषि कानूनों के विरोध में सपा का सांकेतिक धरना

कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किसानों के समर्थन में पीपल चौक पर एकत्र होकर एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सोमवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूर्व जिलाध्यक्ष मौसम अली के नेतृृत्व में कलियर में पीपल चौक पर एकत्र होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ता एक दिवसीय सांकेतिक धरने पर बैठ गए। मौसम अली ने कहा कि भाजपा किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है।

इसलिए किसानों पर कृषि कानूनों को थोप दिए गए। आज पूरे देश के किसान सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार के बनाए कानूनों का विरोध कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी भी इस आंदोलन में किसानों के साथ है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इन कानूनों को वापस लिया जाए।

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