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Kisan Andolan in Uttarakhand : सरकार के वादे पर नहीं भरोसा, आज की वार्ता पर किसान संगठनों की नजर

Fri, 22 Jan 2021 10:37 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 22 Jan 2021 10:37 AM IST
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kisan andolan in uttarakhand latest news: farmers eye on government and kisan talk today
करीब दो महीने से दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए किसान - फोटो : अमर उजाला (File Photo)

तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान करीब दो महीने से दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। 26 जनवरी से पहले शुक्रवार को होने वाली किसान और सरकार के बीच वार्ता पर सबकी निगाहें टिकी हैं। वहीं, किसान संगठनों का कहना है कि सरकार के वादे पर कोई भरोसा नहीं है, कृषि कानून तत्काल वापस होने चाहिए। फिर भी किसान संगठनों का संयुक्त मोर्चा जो फैसला लेगा, उसे माना जाएगा।

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कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा, पंजाब, यूपी और उत्तराखंड के किसान दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए, लेकिन सरकार ने मांगों पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है, जो अभी तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
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पिछली बैठक में सरकार ने आश्वासन दिया था कि कृषि कानूनों को डेढ़ साल के बाद लागू किया जाएगा। सरकार के इस आश्वासन के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ किसान मानकर चल रहे हैं कि शुक्रवार को होने वाली बैठक में कोई रास्ता निकल सकता है, तो कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है। 

सरकार के वादों पर कोई भरोसा नहीं

जुमलेबाज सरकार के वादों पर कोई भरोसा नहीं है। कृषि कानून तत्काल वापस होने चाहिए। कृषि कानूनों के वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि किसान मोर्चा समझौता करता है तो वह मान्य होगा। 
-संजीव तोमर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाकियू (तोमर)

केंद्र सरकार यह जान चुकी है कि मांगें पूरी हुए बिना अब किसान दिल्ली की सड़क खाली नहीं करेंगे। ऐसे में अब किसानों को सड़कों से उठाने के लिए महज आश्वासन दिया जा रहा है। 
-पद्म सिंह रोड़, प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू (रोड़)

देशभर के सभी किसान संगठनों की एक ही मांग है कि तीनों कृषि सुधार कानून वापस होने चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह सर्वमान्य होगा।
-गुलशन रोड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तराखंड किसान मोर्चा 

किसान कृषि कानूनों की वापसी की मांग कर रही है, लेकिन सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। सरकार 17 साल में अपने विधायकों की आय दस बार बढ़ा चुकी है, लेकिन किसानों से कोई सरोकार नहीं है। 
-संजय चौधरी, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष, भाकियू (टिकैत)

केंद्र की भाजपा सरकार लगातार झूठे वादे करती आ रही है। जब तक सरकार की ओर से लिखित में आश्वासन नहीं दिया जाता है कि कृषि कानूनों को वापस किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
-राकेश अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान मजदूर-संगठन सोसायटी 

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