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किडनी कांड: अमित ने दो बार बनवाई थी पॉवर ऑफ अटॉर्नी, इसलिए बचा रहा था लोगों की किडनियां बेचकर पैसा

Sat, 06 Oct 2018 09:22 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 06 Oct 2018 09:22 AM IST
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kidney racket Accused Amit make power of attorney twice For Going to Foreign
Dr.Amit file photo

किडनी कांड का आरोपी अमित राऊत ने एक नहीं बल्कि दो मुख्तारनामे (पॉवर ऑफ अटॉर्नी) बनवाए हैं। ये दोनों मुख्तारनामे उसने अलग-अलग नाम से विकासनगर जाकर बनवाए हैं। इसके लिए उसने अप्रैल माह में अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था। 

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दरअसल, गत अप्रैल में अमित राऊत ने स्थानीय अदालत से मुकदमे के खर्च को पैसे न होने का हवाला देते हुए संपत्तियों को बेचने की बात कही थी। इसके लिए उसने अपने विश्वासपात्र के नाम मुख्तारनामा बनवाने की अनुमति मांगी थी।
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अदालत ने उसे यह अनुमति दी और उसने 21 मई को पहला मुख्तारनामा विकासनगर जाकर बनवाया। यह मुख्तारनामा उसने रविकांत के नाम बनवाया। इसमें रोहित शर्मा निवासी विजय पार्क एक्सटेंशन देहरादून को गवाह बनाया।
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इसमें उसने रविकांत को देहरादून, गुड़गांव, मानेसर और अन्य जगहों की संपत्ति बेचने का अधिकार दिया। इसके अलावा उसने गत 13 सितंबर रोहित शर्मा के नाम एक मुख्तारनामा भी विकासनगर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर किया।
 

विदेश जाने के लिए रखा पैसे का बैकअप 

उसने विदेश जाने के लिए पैसे का बैकअप गुड़गांव के मनी ट्रांसफर एजेंट मकसूद के पास रखा है। मकसूद के पास ओमान के नागरिक ने 60 लाख रुपये आस्ट्रेलियन डॉलर में जमा कराए थे।

ओमान के नागरिक को अमित ने साठ लाख रुपये में किडनी बेची थी, लेकिन मकसूद से उसने यह ऑस्ट्रेलियन डॉलर नहीं लिए हैं। ताकि समय आने पर वह या उसका कोई रिश्तेदार इन्हें लेकर विदेश भाग सके।

न्यायालय को किया गुमराह 
अमित राऊत की अधिकतर संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय ने अटैच की हैं। ऐसे में वह इनमें से किसी को भी नहीं बेच सकता। लगभग तीन साल पहले उसने मानेसर में कोठी बनाई थी। उसके सभी खाते और चल-अचल अन्य संपत्तियां भी अब प्रवर्तन निदेशालय अटैच कर चुका है। 

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