केदारनाथः अब तक पहुंचे 5 हजार,'इन्हें' करना होगा इंतजार
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केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के एक पखवाडे़ बाद भी धाम के लिए हवाई सेवा पर स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
डीजीसीए की टीम केदारघाटी में स्थित हेलीपैडों का निरीक्षण कर चली गई है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिलने से धाम के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू नहीं हो पाई है।
एवीएशन कंपनियां यात्रियों की एडवांस बुकिंग कर रही है। हवाई सेवा के इंतजार में लोग जगह-जगह हेलीपैड पर पहुंच रहे हैं।
यात्राकाल में केदारनाथ धाम के लिए मस्ता, नारायणकोटी, मैखंडा, फाटा और शेरसी के लिए नियमित हवाई सेवाएं चलती हैं, लेकिन एवीएशन कंपनियों को इससे पूर्व हर साल डीजीसीए (डायरेक्टर जनरल आफ सिविल एवीएशन) और उत्तराखंड शासन के नागरिक उड्डयन विभाग की अनुमति लेनी पड़ती है।
एडवांस बुकिंग शुरू कर दी थी
डीजीसीए की संस्तुति के बाद ही एवीएशन कंपनियां हेलीपैडों पर हेलीकाप्टर को लैंडिंग और टेक ऑफ करा सकती हैं जबकि उत्तराखंड शासन सेवा शुरू करने की अनुमति देता है।
डीजीसीए की टीम गत 11 और 12 मई को केदारघाटी का निरीक्षण कर जा चुकी है। अनुमति मिलने की प्रत्याशा में कुछ कंपनियों ने 12 मई से सेवा शुरू करने की बात प्रचारित कर एडवांस बुकिंग शुरू कर दी थी, लेकिन डीजीसीए ने अभी तक उड़ान की अनुमति नहीं दी।
राज्य सरकार ने डीजीसीए को पत्र भेज दिया है कि किस-किस कंपनी को हवाई सेवा की अनुमति दी जा सकती है। डीजीसीए की ओके रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार एविएशन कपंनियों को एनओसी दे देगी। उम्मीद है कि मंगलवार तक हवाई सेवा शुरू हो जाएगी।
-डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
16 दिन में चार हजार 721 श्रद्धालु
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने से अब तक पिछले 16 दिनों में 4,721 श्रद्धालु बाबा के दरबार में मत्था टेक चुके हैं।
वहीं सोमवार को 581 तीर्थयात्री मध्यान्ह 12 बजे तक अलग-अलग जत्थों में सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए रवाना हुए।
जबकि सोनप्रयाग और गुप्तकाशी में 175 श्रद्धालुओं सहित 184 लोगों का केदारनाथ जाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया गया। 335 श्रद्धालु शाम पांच बजे तक बाबा का दर्शन कर लौट चुके थे।
भगवान मद्महेश्वर की डोली धाम को रवाना
द्वितीय केदार मद्महेश्वर भगवान की उत्सव डोली अपने धाम की ओर रवाना हो गई है। सोमवार शाम बाबा की डोली रात्रि विश्राम हेतु रांसी गांव स्थित राकेश्वरी मंदिर में पहुंच गई। सोमवार की सुबह डोली यहां से गौंडार गांव की ओर प्रस्थान करेगी।
मद्महेश्वर शीतकाल में गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान रहते हैं। मद्महेश्वर धाम के कपाट 21 मई को खुलने हैं। इसी के तहत परंपरानुसार रविवार को बाबा मद्महेश्वर की श्रृंगार मूर्ति मंदिर के गर्भगृह से सभामंडप में लाई गई।
सोमवार को बाबा की मूर्ति को चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया। इस मौके पर केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने छह माह की पूजा अर्चना के लिए मद्महेश्वर के प्रधान पुजारी शिव शंकर लिंग को दायित्व दिया।