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केदारनाथः यात्रा शुरू पर खड़े हैं मुश्किलों के पहाड़

Sun, 06 Oct 2013 11:43 AM IST
संदीप थपलियाल/अमर उजाला, केदारनाथ
संदीप थपलियाल/अमर उजाला, केदारनाथ Updated Sun, 06 Oct 2013 11:43 AM IST
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kedarnath yatra is standing on a mountain of problems

आपदा के 111वें दिन दोबारा केदारनाथ यात्रा शुरू तो हुई पर मुश्किलों के पहाड़ अपनी जगह खड़े हैं। स्थानीय लोग भी केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा और मोटर मार्ग को सबसे जरूरी बताते हैं।

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स्वयं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत का मानना है कि यात्रा मार्ग पर सुविधाओं का विकास होना चाहिए। यात्री आएगा और उसको तकलीफ होगी तो अच्छा संदेश नहीं जाएगा।
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सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक सुविधाओं की बहाली के लिए जिला प्रशासन हालांकि पूरी ताकत झोंक रखी है पर विकट परिस्थिति और प्रतिकूल मौसम राह में बाधा बन रहा है।
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पैदल मार्ग घोड़े-खच्चरों के चलने लायक बना
लोनिवि ने पैदल मुंडकटिया से केदारनाथ तक पैदल मार्ग को घोड़े-खच्चरों के चलने लायक बना दिया है, लेकिन भीमबली और लिनचोली से बेस कैंप तक की खड़ी चढ़ाई और ऑक्सीजन की कमी के कारण एक-एक कदम रखना भारी पड़ रहा है।

ये अलग बात है कि भीमबली से केदारनाथ तक मार्ग बुग्याल और मनमोहक फूल-जड़ी-बूटियों के बीच से गुजरता है। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता केके श्रीवास्तव का कहना है कि सुविधा के लिए सड़क का अलाइमेंट बदला जा रहा है, इससे मार्ग की लंबाई लगभग तीन किलोमीटर बढ़ जाएगी।

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एमआरपी में डॉक्टरों की व्यवस्था

लिनचोली में शांतिकुंज द्वारा नि:शुल्क लंगर लगाया गया है। यहीं एमआरपी में डॉक्टरों की व्यवस्था की गई है। दवाई और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। केदारनाथ धाम के बेस कैंप में जहां लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है, वहां बिजली का बुरा हाल है।


रात के घुप अंधेरे में बारिश होने पर स्थिति डरावनी हो रही है। केदारनाथ कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण जुगडाण बताते हैं कि यात्रा शुरू कराकर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है, लेकिन इसके साथ ही अन्य कार्य भी किए जाने चाहिए थे।

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केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा के लिए जल्द ही ट्रीटमेंट कार्य होने चाहिए क्योंकि नदी ठीक पीछे से बह रही है। जो भवन बाढ़ में ध्वस्त होने से बच गए हैं, उनको तोड़ा नहीं जाना चाहिए।

पुरानी स्थिति बहाल करने पर जोर
तीर्थ पुरोहित केशव तिवाड़ी का कहना है कि सरकार को पहले धाम में पुरानी स्थिति बहाल करने पर जोर देना चाहिए। प्राधिकरण के बहाने तीर्थ पुरोहितों के हक छीनने की कोशिश की जा रही है।

वह सवाल उठाते हैं कि हेलीकॉप्टर में एक बार में चार सीमेंट के कट्टे लाकर क्या धाम में काम हो पाएगा? श्रद्धालुओं के लिए पहले दिन नि:शुल्क प्रसाद की व्यवस्था करने वाले महेंद्र पोस्ती, बीरेंद्र पोस्ती, अरुण बगवाड़ी, किशन अवस्थी, कुशला नाथ, पुरुषोत्तम बगवाड़ी और किशन चंद का कहना है कि आपदा से रोजगार बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। अब उम्मीद है कि दोबारा से व्यवस्था ढर्रे पर आएगी।

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