दशहरे पर घोषित हुई तिथि और समय, नौ को केदारनाथ और 20 नवंबर को बंद होंगे बद्रीनाथ मंदिर के कपाट
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भगवान आशुतोष के 12 ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें केदारनाथ धाम के कपाट परंपरानुसार भैयादूज के पावन पर्व पर नौ नवंबर को प्रात: 8.30 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट 22 नवंबर एवं तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 29 अक्तूबर को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। केदारनाथ व द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ और तृतीय केदार तुंगनाथ की पूजा मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में होगी।
विजयदशमी के पर्व पर ओंकारेश्वर मंदिर में आचार्य हर्ष जमलोकी और सत्य प्रसाद सेमवाल ने पंचांग गणना के आधार पर केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने का समय प्रात: 8.30 बजे निर्धारित किया। 11 नवंबर को बाबा केदार अपने शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में छह माह के लिए विराजमान होंगे। आचार्यगणों द्वारा द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि 22 नवंबर को प्रात: 8.30 बजे निर्धारित की गई। द्वितीय केदार 25 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे।
इस दिन ऊखीमठ में मेला भी आयोजित होगा। उधर, मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में आचार्य विजय भारत मैठाणी ने हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि 29 अक्तूबर को प्रात: 10.15 बजे निर्धारित की। बाबा तुंगनाथ की डोली 31 अक्तूबर को अपने शीतकालीन प्रवास मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंचेगी। सवा तीन बजे पुश्य नक्षत्र में पूजा-अर्चना के साथ भगवान की मूर्ति गर्भगृह में विराजमान होगी। धामों के कपाट बंद होने की तिथि व समय तय होने के मौके पर बीकेटीसी के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, वचन सिंह रावत, पुजारी बागेश लिंग, वाईएस पुष्पवाण, देवी तिवारी, मठापति राम प्रसाद मैठाणी, प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, हरिबल्लभ मैठाणी, केवलानंद मैठाणी, थौर भंडारी जीतपाल सिंह, राकेश नेगी, सुनील नेगी दिलवर नेगी आदि मौजूद थे।
बाबा केदार का डोली कार्यक्रम
-09 नवंबर को प्रात: 8.30 बजे कपाट बंद होंगे। इसी दिन बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान होकर रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी।
-10 नंवबर को काशी-विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में रात्रि प्रवास।
-11 नवंबर को शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी डोली। छह माह तक भक्त यहीं करेंगे आराध्य के दर्शन।
द्वितीय केदार मद्महेश्वर का डोली कार्यक्रम
-22 नवंबर को प्रात: 8.30 धाम के कपाट शीतकाल के लिए होंगे बंद। इसी दिन भगवान की चल उत्सव डोली रात्रि प्रवास को पहुंचेगी गौंडार गांव।
-23 नवंबर को रात्रि प्रवास रांसी, 24 को गिरिया और 25 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मदिर ऊखीमठ में 6 माह की पूजा के लिए होगी विराजमान।
तृतीय केदार तुंगनाथ का डोली कार्यक्रम
-29 अक्तूबर को प्रात:10.15 बजे वृश्चिक लग्न में धाम में कपाट बंद होंगे। इसी दिन बाबा तुंगनाथ की चल उत्सव डोली रात्रि प्रवास को चोपता पहुंचेगी।
-30 अक्तूबर को रात्रि प्रवास के लिए भुनकुन गुफा पहुंचेगी डोली, जबकि 31 अक्तूबर को डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ पहुंचेगी। 3.15 बजे पुश्य नक्षत्र में गर्भगृह में छह माह के लिए विराजमान होगी मूर्ति।
20 नवंबर को बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
बद्रीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। शुक्रवार को बद्रीनाथ धाम के परिक्रमा मंडप में बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और वेदपाठियों ने पंचांग देखकर धाम के कपाट बंद होने की तिथि तय की। बद्रीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने तिथि की घोषणा की। बीते वर्ष धाम के कपाट 19 नवंबर को बंद हुए थे।
शुक्रवार को पूर्वाह्न ग्यारह बजे बद्रीनाथ की अभिषेक पूजा के बाद धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, अपर धर्माधिकारी सत्यप्रसाद चमोला और वेदपाठियों ने पंचांग गणना की। धर्माधिकारी ने 20 नवंबर की तिथि को शुभ बताते हुए रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी से चर्चा की। इसके बाद रावल ने 20 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट बंद होने की घोषणा की। परिसर में मौजूद सैकड़ों भक्तों ने जय बद्रीनाथ के जयकारे लगाए। इस मौके पर श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, मंदिर अधिकारी मोहन प्रसाद सती, दफैदार कृपाल सिंह सनवाल, बलदेव मेहता, किशोर पंवार, राजेश मेहता के साथ ही बामणी गांव के हक-हकूकधारी ग्रामीण मौजूद थे।
अगले साल की यात्रा के लिए भंडारे की जिम्मेदारी सौंपी
अगले साल 2019 में छह माह तक बद्रीनाथ के भंडारे का जिम्मा नवीन भंडारी, संदीप सनवाल, दीपक सनवाल और लोकेश पंवार (सभी पांडुकेश्वर निवासी) को सौंपा गया। बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने चारों भंडारियों के सिर पर पगड़ी बांधकर अगले साल की तीर्थयात्रा में बद्रीनाथ के भंडार का जिम्मा सौंपा। बद्रीनाथ के भंडार की जिम्मेदारी मेहता, भंडारी और कम्दी थोक के हक-हकूकधारियों को सौंपी जाती है।
बद्रीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व ये प्रक्रियाएं होंगी संपन्न
16 नवंबर- गणेश व महाभिषेक पूजा के बाद शाम सात बजे गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे।
17 नवंबर- मध्याह्न में आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट होंगे बंद।
18 नवंबर- धाम में वेद ऋचाएं बंद, गुप्त मंत्रों का जाप।
19 नवंबर- लक्ष्मी मंदिर में पूजा व कढ़ाई भोग का आयोजन।
20 नवंबर- माता लक्ष्मी का गर्भगृह में प्रवेश और अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर बद्रीनाथ के कपाट बंद।
20 को बंद होंगे भविष्य बदरी मंदिर के कपाट
20 नवंबर को भविष्य बद्री मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। भविष्य बद्री मंदिर के कपाट भी भगवान बद्रीनाथ के कपाट के साथ ही तीर्थयात्रियों के दर्शनार्थ खोल दिए जाते हैं। भविष्य बद्री मंदिर के पुजारी सुशील डिमरी ने बताया कि इस वर्ष भविष्य बद्री मंदिर के कपाट 20 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर बंद होंगे। भविष्य बद्री मंदिर समुद्रतल से 2744 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ऊंचाई पर होने के कारण शीतकाल में मंदिर बर्फ से ढक जाता है।
गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हुए रुद्रनाथ
विजयदशमी पर्व पर शुक्रवार को पंचकेदारों में चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ गोपेश्वर के प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो गए हैं। अब सात महीने तक भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपीनाथ मंदिर में होंगे। रुद्रनाथ की उत्सव डोली सगर गांव में स्थित प्राचीन सकलेश्वर मंदिर से होते हुए गोपीनाथ मंदिर में पहुंची
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 अक्तूबर को बंद हो गए थे। ल्वींठी बुग्याल और सकलेश्वर मंदिर में प्रवास के बाद शुक्रवार को सकलेश्वर मंदिर में रुद्रनाथ की उत्सव डोली की विशेष पूजा-अर्चना हुई। दोपहर में भोग लगने के बाद रुद्रनाथ की उत्सव डोली ने गोपीनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान किया। पुजारी हरीश भट्ट के साथ अपराह्न तीन बजे डोली गोपीनाथ मंदिर में पहुंची।
भगवान रुद्रनाथ के स्वागत के लिए गोपीनाथ मंदिर परिसर में कई भक्त जुटे हुए थे। गोपेश्वर गांव की महिलाओं और तीर्थयात्रियों ने भी डोली का फूल-मालाओं से स्वागत कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद रुद्रनाथ भगवान गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो गए। इस मौके पर पंडित प्रयागदत्त भट्ट, अनसूया प्रसाद, बदरी प्रसाद, प्रेमबल्लभ भट्ट, कांति भट्ट, नवल भट्ट, नवीन भट्ट, वंशीधर भट्ट, अवतार सिह, मनीष नेगी, महेंद्र सिंह, वीरेंद्र असवाल, चंद्रकला आदि मौजूद थे।
इस दिन बंद होंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट
गंगोत्री के कपाट शुभ मुहूर्त पर आठ नवंबर को होंगे बंद
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्रीधाम के कपाट बंद होने का शुभ मुहूर्त तय हो गया है। गंगोत्री धाम के कपाट 8 नवंबर को दोपहर 12.30 मिनट पर बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद देश-विदेश के श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखीमठ (मुखवा) में कर सकेंगे।
नौ नवंबर को बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट
यमुनोत्री मंदिर के कपाट नौ नंवबर को बंद होंगे। अभी कपाट बंद होने का शुभ मुहूर्त तय नहीं हुआ है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त 17 अक्टूबर बुधवार को नवरात्र के शुभ अवसर पर तीर्थ पुरोहितों ने निकाला। जिसके बाद मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने कपाट बंद करने की शुभ तिथि और शुभ समय की औपचारिक घोषणा भी की।