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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Kedarnath Disaster 11 Years Challenges are still not less broken things fear of landslide

Kedarnath Disaster @11: चुनाैतियां अब भी कम नहीं...कहीं टूटा फूटा सामान, कहीं पहाड़ी का खिसकने का डर

Sun, 16 Jun 2024 01:01 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 16 Jun 2024 01:01 PM IST
सार

Kedarnath Disaster 11 Years: केदारनाथ धाम में आई आपदा को भले ही सालों बीत गए, लेकिन यहां चुनाैतियां अभी भी कम नहीं है। कई काम हैं जो अभी पूरा होना बाकी है।

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Kedarnath Disaster 11 Years Challenges are still not less broken things fear of landslide
केदारपुरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के इतिहास की सबसे भीषण आपदा से उजडे केदारनाथ को पिछले 11 वर्षोंं से संवारने का जो अभियान चल रहा है, उसे लेकर कई तरह की चुनौतियां और सवाल भी खड़े हैं। केदारपुरी में कदम रखते ही वहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों के बीच आसपास बिखरा और फैला टूटा-फूटा सामान, लोहा व सरिया इस अनूठे धाम की शोभा में धब्बों की तरह है।

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2013 में आई जल प्रलय के बाद पीएम मोदी ने केदारनाथ को नया स्वरूप देने का बीड़ा उठाया। मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर पुनर्निर्माण के कई काम हो रहे हैं और कई होने बाकी हैं। लेकिन छह महीने बर्फबारी और काम के महीनों में चारधाम यात्रा का दबाव इसकी गति पर लगाम लगाने का काम कर रहा है। बेशक केदारपुरी में एमआई-17 हेलिकॉप्टर और चिनूक से लेकर थार वाहन तक उतारे जा चुके हैं। लेकिन अभी भी कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब सरकार को पहले ही तैयार कर लेने चाहिए थे।
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Kedarnath Disaster @11: जल सैलाब ने दिए थे गहरे जख्म...पुनर्निर्माण से धीरे-धीरे बदल रही केदारपुरी की तस्वीर

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1. टेंटों से चल रहा काम, स्थायी व्यवस्था नहीं
केदारपुरी में श्रद्धालुओं के लिए इतने वर्षों में ठहरने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। अब भी टेंटों से ही काम चलाया जा रहा है। इस मोर्चे पर सबसे पहले काम किए जाने की आवश्यकता थी।

2. पहले दरकती पहाड़ी का ट्रीटमेंट होना चाहिए था
चिंता की बात यह है कि भैरो मंदिर के नीचे वाली पहाड़ी की तरफ टेंट लगाए गए हैं, जहां बड़ी संख्या श्रद्धालु ठहरते हैं। इस तरफ की पहाड़ी काफी भुरभुरी और नाजुक हैं। कायदे से सबसे पहले मंदिर के आसपास की ऐसी पहाडि़यों का ट्रीटमेंट हो जाना चाहिए था। इसके अभाव में यहां भूस्खलन का खतरा भी है। वहां से मिट्टी और पत्थर गिरते रहते हैं। जब तेज बारिश होती है तो अस्थायी व्यवस्था के नाम पर लोगों को यहां रोक दिया जाता है, लेकिन वहां सुरक्षा और सतर्कता के इंतजाम नहीं हैं।

3. मंदिर के आसपास भीड़ प्रबंधन नहीं बन पाया
शासन के स्तर से लगातार निर्देशों के बावजूद मंदिर के आसपास भीड़ प्रबंधन नहीं हो पाया है। अब भी श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान व्यवस्थित बनाने के लिए इंतजाम नदारद हैं।

4. वाजिब दाम पर चीजें मिलें ऐसे इंतजाम नहीं
केदारपुरी में पानी की एक बोतल 100 रुपये में मिल रही है। खाने-पीने का सामान कई गुना महंगा है। सामान की ढुलाई की लागत इतनी अधिक है कि श्रद्धालुओं को इनकी महंगी कीमत चुकानी पड़ती है। लेकिन सरकार की ओर से ऐसे प्रयास नहीं हुए कि वहां श्रद्धालुओं को वाजिब दाम पर चीजें मिल सके।

5. समन्वय की दिखाई दे रही है कमी
केदारनाथ में एक तरफ पुनर्निर्माण के कार्य चल रहे है। दूसरी तरफ यात्रा चल रही हैं। इन दोनों ही मोर्चों पर लगा सरकारी तंत्र, मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी साफ-साफ नजर आती है। मंदिर प्रबंधन के लोग, पंडा पुरोहित, व्यवस्थापक के बीच तालमेल न होने से मंदिर के बाहर से लेकर भीतर तक व्यवस्थाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इससे श्रद्धालुओं को काफी असुविधा हो रही है।

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