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शीतकाल के लिए बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, लेकिन इस साल मंदिर में लिखा गया नया इतिहास

Fri, 09 Nov 2018 09:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 09 Nov 2018 09:51 AM IST
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Kedarnath Dham Door Closed in winters 2018, Kedarnath Yatra created New history this year

द्वादश ज्योर्तिलिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह बंद हो गए। विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए सुबह 8:30 बजे बाबा केदारनाथ के कपाट किए गए। कपाट बंद होने से पूर्व पुजारी ने मंदिर के गर्भगृह में सुबह तीन बजे से विशेष पूजा अर्चना शुरू की। इसके बाद भक्तों ने केदारबाबा के दर्शन किए।

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भगवान की समाधि पूजा के बाद गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए गए। मंदिर के मुख्य कपाट सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के बाद भगवान की पंचमुखी उत्सव डोली सेना के जेकलाई रेजीमेंट के बेंड की धुनों के साथ अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना हो गई। केदारनाथ की उत्सव डोली रामपुर में रात्रि विश्राम करेगी। 
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इस साल केदारनाथ यात्रा ने नया इतिहास रचा है। पहली बार केदारनाथ धाम में 7 लाख 32 हजार 241 यात्री पहुंचे। 
 

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गुरुवार को बंद कर दिए गए थे गंगोत्री मंदिर के कपाट

बता दें कि, अन्नकूट के पावन पर्व पर गुरुवार दोपहर 12.30 बजे विधि-विधान के साथ गंगोत्री मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मां गंगा की भोगमूर्ति सेना के पाइप बैंड और पारंपरिक ढोल-दमाऊं की अगुवाई में डोली यात्रा के साथ मुखबा के लिए रवाना हुई।

डोली यात्रा रात्रि विश्राम के लिए मार्कंडेय पुरी स्थित चंडी देवी के मंदिर पहुंची। शुक्रवार को गंगा जी की भोगमूर्ति मुखबा स्थित गंगा मंदिर में स्थापित की जाएगी। अब शीतकाल में श्रद्धालु मुखबा में ही गंगा जी के दर्शन कर सकेंगे गंगोत्री धाम में बुधवार को दीपावली का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बृहस्पतिवार को अन्नकूट के पावन पर्व पर सुबह से ही धाम में मंदिर के कपाट बंद करने की तैयारियां शुरू हो गईं थी।

इस अवसर पर गंगा भागीरथी की विशेष पूजा-अर्चना एवं गंगा सहस्त्रनाम पाठ के साथ ही मंदिर में मुख्य पुजारी सुधांशु सेमवाल, मनमोहन उनियाल एवं अनुज उनियाल ने यहां स्थापित गंगा जी की पत्थर की मूर्ति का शृंगार उतारकर भोग मूर्ति का शृंगार किया।

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