फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Kedarnath assembly by-election commotion over ticket increased Congress Bjp Party read all Updates in hindi

Kedarnath Bypoll: उपचुनाव का शंखनाद...टिकट के दावेदारों की धड़कनें तेज, ऐसा रहा है सीट का इतिहास

Wed, 16 Oct 2024 04:16 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 16 Oct 2024 04:16 PM IST
सार

दिवंगत विधायक शैलारानी रावत के निधन से केदारनाथ सीट खाली है। 20 नवंबर को सीट पर उपचुनाव होने हैं।

विज्ञापन
Kedarnath assembly by-election commotion over ticket increased Congress Bjp Party read all Updates in hindi
केदारनाथ उपचुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केदारनाथ विधानसभा उप चुनाव का शंखनाद होने के साथ ही टिकट के दावेदारों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। इस वर्ष नौ जुलाई की रात्रि को केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत के निधन से सीट खाली है।

विज्ञापन


लगभग ढाई माह के इंतजार के बाद अब चुनाव आयोग ने उप चुनाव की घोषणा कर दी है। जिसके साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। विस में 20 नवंबर को चुनाव के तहत मतदान होना है। उप चुनाव को लेकर भाजपा बीते दो माह से विस क्षेत्र में डेरा जमाए हुए है।

विज्ञापन

तीन बार भाजपा व दो बार जीती कांग्रेस
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद प्रदेश में वर्ष 2002 में पहली बार विस चुनाव हुए थे। तब, केदारनाथ विस सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा से आशा नौटियाल विधायक चुनी गईं थी, उन्होंने तब कांग्रेस से प्रत्याशी रहीं शैलारानी रावत को पराजित किया था। वर्ष 2007 में भाजपा ने आशा पर ही विश्वास जताया और उन्हें प्रत्याशी बनाया, जबकि कांग्रेस ने कुंवर सिंह नेगी को मैदान में उतारा पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।

वर्ष 2012 में भाजपा ने लगातार तीसरी बार आशा को प्रत्याशी बनाया, वहीं कांग्रेस ने एक बार फिर शैलारानी रावत को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने पहली बार केदारनाथ विस में कांग्रेस का परचम लहराने के साथ ही वोट बैंक में 29 फीसदी बढ़ोतरी भी की, लेकिन उन्हें विधायकी ज्यादा रास नहीं आई और अक्तूबर 2016 में वह तत्कालीन हरीश रावत सरकार से विद्रोह कर भाजपा में शामिल हो गईं थी।
 

आशा नौटियाल बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरीं

वर्ष 2017 में भाजपा ने उन्हें केदारनाथ विस से टिकट दिया तो पूर्व विधायक आशा नौटियाल बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरी, जिसके चलते कांग्रेस से मनोज रावत पहली बार विस में पहुंचे। स्थिति यह रही कि अपने गढ़ में भाजपा जहां चौथे स्थान पर खिसकी, वहीं आशा नौटियाल को पार्टी से निलंबित कर दिया गया।

ये भी पढ़ें...Pithoragarh: मुख्य चुनाव आयुक्त के हेलिकॉप्टर की मुन्स्यारी में इमरजेंसी लैडिंग, खराब मौसम के बाद उतारा गया

2022 में दूसरी बार विधायक बनी शैलारानी

वर्ष 2022 में हुए विस चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर शैलारानी रावत पर विश्वास जताया और उन्हें प्रत्याशी बनाया। इस दौरान उन्होंने पार्टी के विश्वास पर खरा उतरते हुए जीत दर्ज करने के साथ ही खोए वोट बैंक पर कब्जा भी किया। अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में वह बीमारी से जूझती रहीं। बावजूद, जब भी समय मिला, उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से राज्य व केंद्र सरकार के सामने रखा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed