हजारों फीट ऊंचाई से दुश्मन दाग रहे थे गोली, नहीं हारी हिम्मत
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13 जुलाई 1999 का वह दिन दिगंबर सिंह नेगी आंखों में आज भी उसी तरह तैरता है जैसे वह कल ही की घटना हो। इस दिन कारगिल युद्ध में एक चोटी को फतह करने के बाद वे आखिरी चोटी टाइगर हिल की तरफ बढ़ रहे थे तभी अचानक चोटी से जबरदस्त फायरिंग हुई।
इसी बीच एक गोली उनकी जांघ में लगी और खून बहने लगा। लेकिन उन्होंने होशोहवास नहीं खोया। उपचार के बाद गोली तो निकाल ली गई लेकिन रिटायर्ड होने के बाद भी उनकी वह यादें अब तक ताजा हैं।
रात में की तोरोलिंग चोटी पर चढ़ाई
उन्होंने बताया कि वह 12 जुलाई, 1999 की रात को 14 जवानों को साथ लेकर तोरोलिंग चोटी पर चढ़ाई कर रहे थे। ऊपर से गोलियां बरस रही थी। चढ़ाई बेहद कठिन थी और ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। जिसके चलते उन्हें कुछ नीचे उतरकर अगले पूरे दिन इंतजार करना पड़ा और फिर रात को दोबारा चढ़ाई शुरू करते हुए दो कंपनी की मदद से 17 पाक सैनिकों को मार भगाया। लेकिन टाइगर हिल चोटी की तरफ कूच करते समय गोली लगने से बुरी तरह जख्मी हो गए।
हमारे जवानों में था जोश और गर्व
दिगंबर सिंह नेगी ने युद्ध के अनुभवों का साझा करते हुए बताया कि कारगिल युद्ध में कठिनाइयों के बावजूद भारतीय सैनिक विरोधियों पर भारी पड़े। भारतीय जवानों में भारी जोश और गर्व था। सभी सैनिकों में एक ही भावना थी कि ‘मरो या मारो’। मूल रूप से पौड़ी के नैनीडांड ब्लॉक के रहने वाले दिगंबर सिंह इन दिनों शिवाजीनगर कॉलोनी में रहते हैं। उनका एक बेटा बंगलुरु में सेना का कमांडो है। जबकि दो बेटे प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं।