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हजारों फीट ऊंचाई से दुश्मन दाग रहे थे गोली, नहीं हारी हिम्मत

Tue, 26 Jul 2016 02:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Tue, 26 Jul 2016 02:08 PM IST
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kargil war hero digambar singh negi 
दिगंबर सिंह नेगी - फोटो : AmarUjala
फायर बेस कमांडर के रूप में 14 जवानों की अगुवाई कर रहे दिगंबर सिंह नेगी कारगिल युद्ध फतह से ठीक एक चोटी पहले गोली के शिकार हुए। इलाज के दौरान उनकी जांघ में लगी गोली निकाल दी गई। हजारों फीट ऊंचाई से गोली दाग रहे दुश्मनों से लोहा लेने वाले दिगंबर सिंह नेगी ने बताया कि वास्तव में कारगिल युद्ध में बेहद कठिन लड़ाई थी। बावजूद इसके भारतीय सेना ने जीत हासिल की।
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13 जुलाई 1999 का वह दिन दिगंबर सिंह नेगी आंखों में आज भी उसी तरह तैरता है जैसे वह कल ही की घटना हो। इस दिन कारगिल युद्ध में एक चोटी को फतह करने के बाद वे आखिरी चोटी टाइगर हिल की तरफ बढ़ रहे थे तभी अचानक चोटी से जबरदस्त फायरिंग हुई।
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इसी बीच एक गोली उनकी जांघ में लगी और खून बहने लगा। लेकिन उन्होंने होशोहवास नहीं खोया। उपचार के बाद गोली तो निकाल ली गई लेकिन रिटायर्ड होने के बाद भी उनकी वह यादें अब तक ताजा हैं।
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रात में की तोरोलिंग चोटी पर चढ़ाई

kargil war hero digambar singh negi 
कारगिल वार

उन्होंने बताया कि वह 12 जुलाई, 1999 की रात को 14 जवानों को साथ लेकर तोरोलिंग चोटी पर चढ़ाई कर रहे थे। ऊपर से गोलियां बरस रही थी। चढ़ाई बेहद कठिन थी और ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था। जिसके चलते उन्हें कुछ नीचे उतरकर अगले पूरे दिन इंतजार करना पड़ा और फिर रात को दोबारा चढ़ाई शुरू करते हुए दो कंपनी की मदद से 17 पाक सैनिकों को मार भगाया। लेकिन टाइगर हिल चोटी की तरफ कूच करते समय गोली लगने से बुरी तरह जख्मी हो गए। 

हमारे जवानों में था जोश और गर्व 
दिगंबर सिंह नेगी ने युद्ध के अनुभवों का साझा करते हुए बताया कि कारगिल युद्ध में कठिनाइयों के बावजूद भारतीय सैनिक विरोधियों पर भारी पड़े। भारतीय जवानों में भारी जोश और गर्व था। सभी सैनिकों में एक ही भावना थी कि ‘मरो या मारो’। मूल रूप से पौड़ी के नैनीडांड ब्लॉक के रहने वाले दिगंबर सिंह इन दिनों शिवाजीनगर कॉलोनी में रहते हैं। उनका एक बेटा बंगलुरु में सेना का कमांडो है। जबकि दो बेटे प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं।

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